इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के एक व्यक्ति के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की अदालत ने भविष्य में केवल एक या दो मुकदमों के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई नहीं करने के अपर पुलिस आयुक्त की ओर से अपर महाधिवक्ता के आश्वासन पर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के एक व्यक्ति के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की अदालत ने भविष्य में केवल एक या दो मुकदमों के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई नहीं करने के अपर पुलिस आयुक्त की ओर से अपर महाधिवक्ता के आश्वासन पर दिया है।
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वाराणसी निवासी पीयूषकांत के खिलाफ कैंट थाने में दो मुकदमों के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई थी। पीयूष ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि मुवक्किल पर एक मुकदमा-2019 में और दूसरा 2024 में दर्ज हुआ है। इन दोनों का संबंध सार्वजनिक शांति या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने से नहीं है।
उन्होंने गोवर्धन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और रवि बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसलों का हवाला दिया। कहा, किसी व्यक्ति को केवल एक या दो मामलों के आधार पर आदतन अपराधी या गुंडा नहीं माना जा सकता।
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खंडपीठ ने कहा, मामले में अपर पुलिस आयुक्त पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाने का विचार किया था लेकिन अपर महाधिवक्ता के अनुरोध और आश्वासन के बाद निर्णय वापस ले लिया हूं।