आरोपियों की तरफ से कहा गया कि घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी करार दिया गया है। हत्या, दुष्कर्म करने का उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। सीबीआई की तरफ से कहा गया कि अपराध अमानवीय एवं क्रूरतम व जघन्य है। वैज्ञानिक साक्ष्यों व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से अपराध में संलिप्त होने की पुष्टि की गई है। फांसी की सजा की पुष्टि की जाए। दोनों पक्षों को सुनकर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।