पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती।
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कहा कि हिंदुओं के मठ-मंदिर शुद्धता और शिक्षा के केंद्र होने चाहिए। सनातन धर्म के सवाल पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि सभी के पूर्वज सनातनी हिंदू थे। इसलिए भारत को हिंदू राष्ट्र बनने में किसी को कोई विरोध नहीं होना चाहिए। समान नागरिक संहिता के सवाल पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि जैसा व्यवहार हम दूसरों से चाहते हैं। वैसा ही व्यवहार हमें भी दूसरे के साथ करना चाहिए।
वैराग्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि आशक्तता जीवन को अधीन बना देता है। जो विरक्त होता है, वह उससे मुक्ति पा लेता है। इस मौके पर प्रफुल्ल जी महाराज, सुरेश सिंह, विवेक मिश्र, नवीन शुक्ल, दिव्यकांत त्रिपाठी, आयुष सिंह, दीपक शुक्ल, नरेंद्र तिवारी आदि मौजूद रहे।