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Prayagraj : गंगा पुल निर्माण पर एनजीटी की आपत्ति, पर्यावरण के नुकसान का होगा आकलन

Thu, 23 Apr 2026 06:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने प्रयागराज में गंगा नदी पर नैनी से झूंसी के बीच बन रहे पुल(इनर रिंग रोड) और उससे जुड़े कार्यों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर आपत्ति जताई।
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सेतु। - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने प्रयागराज में गंगा नदी पर नैनी से झूंसी के बीच बन रहे पुल(इनर रिंग रोड) और उससे जुड़े कार्यों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर आपत्ति जताई। कहा कि बिना पूर्व अनुमति के निर्माण कार्य शुरू करना नियमों के खिलाफ है। भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। साथ ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को निरीक्षण कर पर्यावरण के नुकसान का आकलन करने का आदेश दिया है।

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यह आदेश प्रयागराज के भारतीय किसान यूनियन पुरवा के सचिव की याचिका पर दिया। याची ने आरोप लगाया था कि एनएचआई और उसकी सहयोगी कंपनी जीपीटी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने गंगा पर पुल निर्माण का कार्य राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से पूर्व अनुमति लिए बिना शुरू कर दिया। साथ ही कंक्रीट बैचिंग प्लांट भी बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लिए संचालित किया जा रहा है।

एनजीटी ने कहा कि एनएमसीजी की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। गंगा के तट और फ्लड प्लेन क्षेत्र निर्माण मुक्त क्षेत्र हैं। एनएचआई ने अनुमति लिए बिना काम शुरू किया, जो नियमों का उल्लंघन है। हालांकि, बाद में एनएचआई ने एक मई 2025 को एनएमसीजी से अनुमति प्राप्त कर ली। बैचिंग प्लांट बिना अनुमति संचालित हुआ, जिस पर यूपीपीसीबी ने इस पर 10 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाने की प्रक्रिया शुरू की।
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एनजीटी ने मामले का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में एनएचआई और एनएमसीजी से पहले अनुमति ले। यूपीपीसीबी पुराने उल्लंघनों के लिए पर्यावरणीय मुआवजा वसूले। 10 लाख रुपये के मुआवजे की वसूली तीन महीने में पूरी की जाए।

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