विपक्षी मंदिर पक्ष का कहना था कि भगवान विश्वेश्वर स्वयंभू भगवान हैं। वह प्रकृति प्रदत्त हैं। मानव द्वारा निर्मित नहीं हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के एम सिद्दीकी बनाम महंत सुरेश दास व अन्य केस के फैसले का हवाला दिया था। उन्होंने कहा मूर्ति स्वयंभू प्राकृतिक है। इसलिए प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा चार इस मामले में लागू नहीं होगी।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद सभी विचाराधीन याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित कर लिया था। कुछ मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए फिर से सुनवाई हुई। कोर्ट ने कुछ मुद्दों पर सवालों के जवाब लिए। समयाभाव के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी थी और अगली सुनवाई की तिथि 14 जुलाई नियत की गई थी। अब यह सुनवाई 25 जुलाई को होगी।