बकौल सीबीआई, कोली ने उसी दिन पुलिस के समक्ष जुर्म का इकबाल किया और नरकंकालों की बरामदगी भी कराई। इसका ब्योरा थाने की जनरल डायरी (जीडी) में रात 11 बजे दर्ज किया गया। कोर्ट के पूछने पर सीबीआई के वकील ने बताया कि जीडी के अलावा मौके पर अलग से कोई फर्द गिरफ्तारी नहीं बनाई गई थी। गिरफ्तारी की सूचना रात को ही कोली के उत्तराखंड में रह रहे परिजनों को दी गई थी। हालांकि, सीबीआई परिजनों को सूचना देने का कोई दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर पाई।
इसके पहले, कोली के वकील ने दावा किया था कि गांव से बुला कर 27 दिसंबर को ही पुलिस ने कोली को हिरासत में ले लिया था। 29 दिसंबर को पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं की, बल्कि नाटकीय घटनाक्रम जीडी पर दर्ज किया है। कोली को इकबालिया बयान अमानवीय यातानाएं देकर पुलिस द्वारा रटवाया गया था, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के वाद में गिरफ्तारी के समय अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकारों पर दिए गए दिशा निर्देशों को स्पष्ट उल्लघंन है।