‘तेल बचाएं देश बचाएं’ का नारा पुराना है लेकिन मोदी सरकार रेलवे के जरिए बड़ा काम शुरू करने जा रही है। रेलवे इसके लिए सभी डीजल इंजनों में तेल की खपत कम करने वाले एक्जिलरी पॉवर यूनिट (एपीयू) का इस्तेमाल करने जा रहा है। अभी केवल 129 इंजनों में ही यह यूनिट लगा दी गई गई हैं। रेलवे ने तय किया है कि 2016-17 से बनने वाले सभी नए इंजनों में इसी यूनिट को लगाना अनिवार्य होगा। तेल बचत के लिए लोको पायलटों को प्रशिक्षित भी करने का फैसला किया गया है।
रेलवे का दावा है कि योजना पर अमल कर अगले कुछ वर्षों में डीजल मद में करोड़ों रुपये की बचत की जा सकेगी। पिछले सप्ताह दिल्ली में हुई सीएमई कांफ्रेंस में भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श हुआ है। रेलवे हर साल केवल डीजल पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम खर्च कर रहा है। वर्ष 2012-13 में यह खर्च 24 हजार करोड़ तक पहुंच गया था। इस खर्च को कम करने के लिए मोदी सरकार ने रेल मार्गों के विद्युतीकरण पर जोर दिया है। रेल अफसरों के मुताबिक आरडीएसओ के परीक्षण में पास हो चुके एक्जिलरी पॉवर यूनिट को लगाने में तेजी लाने का फैसला किया है। तेल खर्चों में तेजी से कमी लाई जा सके, इसके लिए रेल मंत्रालय नए इंजनों में एपीयू का इस्तेमाल करेगा। अभी उत्तर रेलवे, एनसीआर, ईसीआर, एनएफआर, एसडब्ल्यूआर, ईस्टर्न रेलवे आदि के 22 डीजल शेड के 93 इंजनों में लगे एपीयू का आरडीएसओ ने इस्तेमाल देखा। इसमें केवल लुधियाना शेड ने नई प्रणाली का 75 फीसदी उपयोग किया है। काजीपेट शेड ने 9.07 और एनसीआर के झांसी शेड ने 15.35 फीसदी ही प्रयोग किया।
इसमें स्विच कट आउट, बैटरी चार्जिंग, एयर प्रेशर, रिजर्व वायर, ब्रेक सिलेंडर प्रेशर, फ्यूल सेल, फ्यूल स्टोरेज और कंप्रेशर में सुधार किया गया है। साथ ही माइक्रोप्रोसेसर फ्यूलसेल और स्वचालित लोड मोड को अपनाया गया है। बंद इंजन को स्टार्ट करने के दौरान खर्च होने वाले तेल की खपत में भी कमी लाई गई है। रेलवे अफसरों का दावा है कि इस प्रणाली के जरिए अगले दो-तीन साल बाद तेल मद में दो से तीन हजार करोड़ रुपये सालाना की बचत संभव है। साथ ही इंजन की कार्य क्षमता और रफ्तार में भी इससे फर्क पड़ सकता है।