‘अमर उजाला’ की ओर से चाइनीज मंझे के खिलाफ चलाई गई मुहिम का असर मकर संक्रांति पर भी दिखा। खिचड़ी पर आसमान में खूब पतंगें उड़ीं लेकिन चाइनीज मंझे के बिना। इससे आम शहरियों के साथ ही आसमान में उड़ने वाले परिंदों को भी राहत मिली। चाइनीज मंझे से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी देखी गई। पतंगबाजी के शौकीनों ने चाइनीज मंझे को दरकिनार करते हुए जमकर पेच लड़ाया लेकिन बीते वर्षों की तरह चाइनीज मंझे से होने वाली दुर्घटना की खबर नहीं मिली।
बता दें, अमर उजाला ने चाइनीज मंझे से होने नुकसान के खिलाफ अभियान चलाया था। अभियान का ही असर रहा कि हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई और हाईकोर्ट ने चाइनीज मंझे की बिक्री और कारोबार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। मकर संक्रांति को पतंग उड़ाने की परंपरा रही है सो जमकर पतंगबाजी हुई लेकिन लोगों ने चाइनीज मंझे का बहिष्कार किया। पतंग कारोबार से जुडे़ समाजसेवी मो.यासिर उर्फ बादशाह,अटाला व्यापार मंडल अध्यक्ष फैयाज अहमद कुरैशी, समाजसेवी मो. हारून, पतंगबाजी के शौकीन रानी मंडी के मसर्रत का कहना है कि अमर उजाला ने चाइनीज मंझे के खिलाफ चलाए गए अभियान का नतीजा है कि चाइनीज मंझा बाजार से गायब रहा।
व्यक्तियों ही नही पक्षियों के लिए भी चाइनीज मंझा बहुत खतरनाक था। इसका उपयोग न होने से पक्षियों को बड़ी राहत मिली है और इस वजह से जो पक्षी मरते थे, उनकी संख्या में कमी आई है। इस बारे में अमर उजाला की कोशिश सराहनीय है।
0 प्रोफेसर दीनानाथ शुक्ल,
सह समन्वयक, पर्यावरण केंद्र, इविवि
‘पर्यावरण में पक्षियों का विशेष महत्व है। चाइनीज मंझा से इन्हें खतरा था। इस पर बैन का निश्चित ही फायदा हुआ है। इसके खिलाफ अमर उजाला का अभियान प्रशंसनीय रहा। पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसी पहल की जरूरत है। ’
प्रोफेसर अनुपम दीक्षित, विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान, इविवि
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चाइनीज मंझे की चपेट में बड़ी संख्या में पशु और पक्षी आते रहे हैं। अमर उजाला के अभियान का काफी असर पड़ा है। पहले के मुकाबले पक्षियों के घायल होने की संख्या में कमी आई है। परिंदे हमारे जीवन का हिस्सा हैं।
0 केएस यादव, क्षेत्रीय वनाधिकारी