मंत्री नंदी पर हमले और डॉ. एके बंसल हत्याकांड में दिलीप का आया था नाम
सूची में शामिल दिलीप मिश्र नैनी इलाके के लवायन कला गांव का निवासी है। यह नैनी के चाका का ब्लाक प्रमुख रह चुका है। इसकी पत्नी गांव की प्रधान और जिला पंचायत सदस्य रह चुकी है। यूपी के कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी पर हुए हमले में इसका नाम आया था। हमले में नंदी गंभीर रूप से घायल हो गए थे जबकि एक सिपाही समेत दो लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा दिलीप मिश्र शहर के नामचीन डॉक्टर और जीवन ज्योति हास्पिटल के संचालक डॉ. एके बंसल की हत्या में भी नामजद है। दिलीप फिलहाल फतेहगढ़ की जेल में बंद है। गत दिनों जेलर को धमकाने के मामले में भी उस पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
डॉ. कार्तिकेय शर्मा अपहरण कांड में आया था राजेश यादव का नाम, छोटा राजन का है शार्प शूटर
डा. कार्तिकेय शर्मा को 2004 में सिविल लाइंस में उनके घर के पास से ही उठा लिया गया था। पुलिस ने जांच शुरू की तो राजेश यादव और श्लोक पंडित के नाम सामने आए। पुलिस उन्हें पकड़ने का प्रयास करती रही। मामला प्रदेश स्तर तक चर्चित रहा और तत्कालीन डीजीपी खुद पर्यवेक्षण करने लगे। करीब दस दिन बाद कार्तिकेय शर्मा छूटकर वापस आए। वह तो वापस आए गए लेकिन राजेश और श्लोक जरायम की दुनिया का बड़ा नाम बन गए थे। पुलिस ने श्लोक को वाराणसी में मुठभेड़ में मार गिराया। राजेश मुंबई भाग निकला था। इसी दौरान उसकी मुलाकात छोटा राजन के एक करीबी से हुई और वह राजन गिरोह से जुड़ गया।
16 अक्टूबर 2006 को मुंबई में काला घोड़ा इलाके में दिन दहाड़े शूटआउट हुआ था। इसे छोटा राजन ने अपने गुर्गों से अंजाम दिलवाया था। बाद में पता चला कि राजन ने इसे अपने यूपी वाले गिरोह यानी राजेश यादव और खान मुबारक (अंबडेकरनगर) के माध्यम से करवाया। खान के भाई जफर सुपारी के पकड़े जाने के बाद बच्चा पासी को पुलिस ने उठा लिया था। राजेश, बच्चा के अलावा अशोक नगर के नीरज बाल्मीकि और झूंसी के आशीष मिश्रा का भी नाम काला घोड़ा शूटआउट में आया था। इस कांड के बाद छोटा राजन इतना खुश हुआ कि उसने राजेश यादव को नए शूटरों को गिरोह से जोड़ने की जिम्मेदारी दे दी। पिछले कुछ सालों से राजेश जमीन की खरीद फरोख्त और रंगदारी के धंधे में है। जरायम के पैसों से उसने करोड़ों की संपत्ति बना ली है। योगी सरकार वन में झूंसी स्थित इसके मकान को ध्वस्त कर दिया गया था।
नौ महीने से फरार है माे. जावेद उर्फ पप्पू गंजिया
इस सूची में शामिल मो. जावेद उर्फ पप्पू गंजिया नौ महीने से फरार है। नैनी के गंजिया का रहने वाला पप्पू पहले दबंगई करता था। धीरे-धीरे उसका जरायम की दुनिया में नाम बड़ा होता चला गया। इस पर कुल 42 मुकदमे दर्ज हैं। नैनी थाने का यह हिस्ट्रीशीटर भी है। नैनी के अलावा उस पर घरूपर, कोतवाली, धूमनगंज में भी मुकदमा है। रंगदारी मांगने के मामले में वांछित पप्पू के घर पर दो महीने पहले ही कुर्की की कार्रवाई की गई है।
कमरुल हसन और जाबिर हुसैन
बेली निवासी कमरुल हसन और उसका भाई जाबिर कुख्यात अपराधी हैं। जमीन पर कब्जा करना, रंगदारी मांगने समेत तमाम धाराओं में उन पर मुकदमे दर्ज हैं। जाबिर पर 18 और कम्मू पर 16 आपराधिक मुकदमे हैं। कभी दोनों भाई अतीक अहमद के बेहद करीबी थे। सपा सरकार में करेली थाना क्षेत्र स्थित कब्रिस्तान की कुछ जमीन को प्लाटिंग करके बेचने के मामले में अतीक नाराज हो गया था। बाद में उसने इन जमीनों पर बने मकानों को जेसीबी चलवाकर ढहवा दिया था। इसके बाद वह कांड हुआ जिसने जिले को हिला दिया। 2015 में ईद के दिन मरियाडीह में प्रधान आबिद की चचेरी बहन अल्कमा और ड्राइवर को गोलियों से भून दिया गया था।
दोहरे हत्याकांड में आबिद ने कम्मों और जाबिर समेत सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। गलत नामजदगी का आरोप लगाते हुए हंगामा भी हुआ था। बाद में सरकार बदलने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर दोहरे हत्याकांड की विवेचना शुरू हुई तो कहानी पलट गई। पुलिस ने दावा किया कि अतीक और अशरफ के इशारे पर आबिद प्रधान ने साजिशन हत्या करवाई और फिर दोनों भाइयों को फंसा दिया। इस घटनाक्रम के बाद कम्मो और जाबिर ने खुद को अतीक गैंग से अलग करके नया गुट बनाया। फिर अपराध के बल पर प्रापर्टी डीलिंग का काम शुरू कर दिया।
गणेश पर 10 मुकदमे हैं दर्ज
हवेलिया झूसी निवासी गणेश यादव पर 10 मुकदमे दर्ज हैं। 2020 में माफिया के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उसके आलीशान मकान को भी बुलडोजर चलवाकर ढहा दिया गया था।