एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने मिथ्या साक्ष्य देने पर नोटिस देकर परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने फंसाए गए एसी मैकेनिक को बरी भी कर दिया है। जीएचएस के सामने रहने वाली सरोजा देवी ने एसएसपी को दी शिकायत में कटरा-मनमोहन पार्क निवासी परवेज आलम के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और जाति-सूचक शब्द कहने के आरोप लगाए थे।
गर्ल्स हाईस्कूल (जीएचएस) के पास छह साल पहले बेटे से मारपीट और जातिसूचक गालियां देने का मुकदमा लिखाकर कोर्ट में बयान बदलने वाली पड़ोसन खुद कानूनी फंदे में फंस गई है। एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने मिथ्या साक्ष्य देने पर नोटिस देकर परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने फंसाए गए एसी मैकेनिक को बरी भी कर दिया है। जीएचएस के सामने रहने वाली सरोजा देवी ने एसएसपी को दी शिकायत में कटरा-मनमोहन पार्क निवासी परवेज आलम के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और जाति-सूचक शब्द कहने के आरोप लगाए थे। कहा था, घर के बाहर एसी की दुकान चलाने वाला परवेज आलम उनके बेटे सोनू उर्फ सनी से रंजिश रखता था।
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इसी कारण 30 जुलाई 2018 की शाम चार बजे सोनू जब परचून की दुकान से कुछ सामान लेने निकला तो परवेज ने हमला कर दिया। सात-आठ लड़के और बुला लिए। जाति सूचक गालियां दीं। वह बचाने गई तो उसे भी पीटा, जिसमें बेटे समेत उन्हें गंभीर चोटें आईं।प्रकरण की विवेचना तत्कालीन सीओ श्रीश चंद्र ने की और परवेज के खिलाफ ठोस साक्ष्य का दावा करते हुए परवेज के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। हालांकि, साक्ष्यों का परीक्षण शुरू होते ही अभियोजन के दावों की हवा निकल गई।
खुद वादी सरोजा देवी ने ही कोर्ट में कुबूल किया कि उन्होंने परवेज को मारते-पीटते नहीं देखा था। जाति-सूचक गालियां देते हुए भी नहीं सुना।पीटने से नहीं, किसी का धक्का लगने से वह गिरी थीं, जिसमें उनकी कुछ चूड़ियां टूट गई थीं। यह मुकदमा भी कुछ लोगों के कहने पर लिखा दिया था। दूसरे गवाहों ने भी परवेज पर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं की। इसके बाद विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) निर्भय प्रकाश की अदालत ने बृहस्पतिवार को सुनाए फैसले में परवेज को आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही, झूठे साक्ष्यों के सहारे मुकदमा लिखाने वाली सरोजा देवी को नोटिस जारी कर उनके खिलाफ कोर्ट में परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया।