इन्हीं पीड़ितों में से बाबूपुर बेलो निवासी खेती करने वाले लाल पाल हैं। इनका 18 वर्षीय बेटा मानसिक रूप से दिव्यांग है। जब बेटे को ई-रिक्शा से लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे तो पूरे दिन खड़े रखने के बाद इन्हें यह कहकर वापस कर दिया गया कि प्रमाणपत्र में रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं है। इसलिए पूरी प्रक्रिया फिर से करनी पड़ेगी। लाल ने कहा कि साहब...मेरा बेटा मानसिक रूप से दिव्यांग है। सीएमाओ कार्यालय में कहा गया कि यह प्रमाणपत्र सही नहीं है। अब मैं अपने बेटे को लेकर कहां-कहां भटकूं।
हंडिया तहसील में 2019 के दिव्यांग महाकुंभ में बनाए गए प्रमाणपत्र में रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं डाले गए हैं। वहीं, 2023 में प्रतापपुर ब्लॉक में भी शिविर लगा 200 लोगों की जांच की गई, लेकिन आज तक उनके प्रमाणपत्र कोरियर से आ नहीं सके। अब दिव्यांग सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे। - राम सजीवन, ग्राम प्रधान, गुरबेला, प्रतापपुर
ये प्रमाणपत्र शिविर के दौरान जारी किए गए थे। इनमें रजिस्ट्रेशन नंबर न होने की बात मेरे संज्ञान में नहीं है। कुछ लोगों की शिकायत सामने आई है, जिसके संबंध में जानकारी इकट्ठा की जा रही है। समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। इसके अलावा दिव्यांगता प्रमाणपत्र एक साल बाद भी न मिलने के मामले को मैं पता कराता हूं। -डॉ.नवीन गिरी, डिप्टी सीएमओ व नोडल दिव्यांग बोर्ड