बोड़ाकी जंक्शन का प्रस्तावित मानचित्र।
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भूमि का अधिग्रहण किया गया तेज
परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल 200.84 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इसमें से अकेले रेलवे की जरूरतों के लिए 110.54 हेक्टेयर जमीन चाहिए, जबकि फिलहाल रेलवे के पास 55 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। शेष भूमि की उपलब्धता होते ही निर्माण कार्यों में और तेजी आएगी। इस हब के विकसित होने से न केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा बल्कि समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास और कनेक्टिविटी को नई उड़ान मिलने की उम्मीद है।
एनसीआर ने तैयार किया रेलवे स्टेशन का इंजीनियरिंग स्टेट प्लान
इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की एजेंसी नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी) और राज्य सरकार की एजेंसी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (आईआईटीजीएनएल) को सौंपी गई है। खास बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की फंडिंग भी इन्हीं दोनों एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी। इस परिवहन केंद्र को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रियों को एक ही छत के नीचे रेलवे, इंटर स्टेट बस टर्मिनल, लोकल बस टर्मिनल और रैपिड रेल की सुविधाएं मिल सकेंगी। उत्तर मध्य रेलवे ने स्टेशन का इंजीनियरिंग स्टेट प्लान (ईएसपी) बनाकर सबमिट कर दिया है।
एनसीआर प्रशासन ने प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का इंजीनियरिंग स्टेट प्लान बनाकर उसे संबंधित एजेंसी को सबमिट कर दिया है। इस स्टेशन का नाम ग्रेटर नोएडा हो सकता है। - शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, एनसीआर
प्रस्तावित योजना
- पहले चरण का निर्माण कार्य होने के बाद यहां पर लंबी दूरी की 33 ट्रेनों का ठहराव करने की है योजना।
- दूसरे चरण का काम पूरा होने के बाद यहां से रेलवे द्वारा लंबी दूरी व सबअर्बन समेत कुल 115 ट्रेनों का किया जाएगा संचालन।
- स्टेशन पर बिछाई जाएंगी कुल 33 लाइन, सिक लाइन एवं वॉशिंग लाइन की भी रहेगी व्यवस्था।
- 20-20 वंदे भारत एवं एलएचबी ट्रेनों के रेक खड़े रहने की रहेगी व्यवस्था।
- इस मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की कुल लागत तकरीबन 5500 करोड़ रुपये है, रेलवे स्टेशन के निर्माण पर खर्च होंगे 1726 करोड़ रुपये।