उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए जोन का पहला सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच (सौर ऊर्जा संचालित यात्री डिब्बा) तैयार किया है। इस नवाचार से रेलवे को न केवल वित्तीय लाभ होगा बल्कि जहरीले कार्बन उत्सर्जन पर भी लगाम लगेगी। जल्द ही कुछ ट्रेनों में सोलर कोच का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए जोन का पहला सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच (सौर ऊर्जा संचालित यात्री डिब्बा) तैयार किया है। इस नवाचार से रेलवे को न केवल वित्तीय लाभ होगा बल्कि जहरीले कार्बन उत्सर्जन पर भी लगाम लगेगी। जल्द ही कुछ ट्रेनों में सोलर कोच का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
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इस विशेष कोच की छत पर अत्याधुनिक 6.93 किलोवाट पीक क्षमता का सोलर सिस्टम लगाया गया है। इससे डिब्बे के अंदर लगे पंखे, लाइटें और मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट्स को बिना किसी रुकावट के लगातार बिजली मिलेगी। बताया जा रहा है कि इस सोलर संयंत्र से प्रति कोच हर साल लगभग 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा।
इससे रेलवे को एक ही कोच से सालाना करीब 2.80 लाख रुपये के राजस्व की बचत होने का अनुमान है। साथ ही, डीजल चालित जेनरेटर पर निर्भरता घटने से रेलगाड़ी के पहियों का घर्षण भी कम होगा जिससे ट्रेनों की परिचालन क्षमता में सुधार आएगा। बतादें कि ट्रायल के लिए दादरी एक्सप्रेस में सोलर कोच को लगाया जा चुका है।
11 टन घटेगा कार्बन उत्सर्जन
एक सोलर कोच के संचालन से हर साल लगभग 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा। रेल अधिकारियों का मानना है कि यह प्रयोग यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के साथ-साथ ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ाई में मील का पत्थर साबित होगा। इस सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद उत्तर मध्य रेलवे की योजना इस वर्ष ऐसे 20 और कोच तैयार करने की है।
पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से यह तकनीक बेहद कारगर है। इस सोलर कोच के संचालन से प्रति वर्ष लगभग 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। - डॉ.. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे