नव संवत्सर यानी नववर्ष नवरात्रि अपनी जड़ों को पोषित करने का समय है। नवरात्र शक्ति स्वरूप मां जगदंबा के नौ रूपों को पूजने के विशेष दिन हैं। नवरात्र साल में दो बार आते हैं लेकिन चैत्र नवरात्र का पहला दिन भारतीय नववर्ष का पहला दिन होता है।
उक्त बातें प्रांत संघचालक डॉ. विश्वनाथ लाल निगम ने मंगलवार को कहीं। वह जार्जटाउन स्थित संघ कार्यालय में नवसंवत्सर महोत्सव समिति संस्कार भारती प्रयाग के तत्वावधान में आयोजित नववर्ष स्वागत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहाकि ऐसे कार्यक्रमों से हमारी भारतीय संस्कृति विकसित होने के साथ सुरक्षित भी रहेगी। इस मौके पर महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने कहा कि आज हम जिस पश्चिमी सभ्यता का अंधा अनुकरण कर रहे हैं वह समाज के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहाकि हमें अपनी भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कराते रहना चाहिए। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने फोन पर अपनी शुभकामनाएं दीं।
इस मौके पर एनसीजेडसीसी के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए । इससे पहले जिलाप्रचारक सर्वेश ने दीप जलाकर कार्यक्रम शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जिला संघचालक व्यंकटेश्वर प्रसाद, जिला प्रचारक अनुराग, गजेंद्र, शांतनु आचार्या, मनीष शुक्ल, शिवनंदन, अशोक मेहता, संजीव, शिवप्रकाश, डॉ. एलएस ओझा, डॉ. संतोष, डॉ. श्याम प्रकाश आदि मौजूद रहे। वहीं विहिप कार्यालय में संस्कार भारती की ओर से नव संवत्सर महोत्सव आयोजित किया गया। छात्र-छात्राओं ने भजन प्रस्तुत किए।