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शारदीय नवरात्र कल से, घर-घर देवी उपासना

Mon, 12 Oct 2015 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। देवी आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र मंगलवार से शुरू हो रहा है। अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से घर-घर देवी की नौ दिनी उपासना की जाएगी। लोग व्रत रखेंगे, कलश स्थापना करेंगे। प्रथम दिन भगवती के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा अर्चना की जाएगी।
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शहर के प्रमुख सिद्धपीठों  मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर, कल्याणी स्थित सिद्धपीठ कल्याणी देवी, अलोपीबाग स्थित सिद्धपीठ अलोपशंकरी, चौक गंगादास स्थित शक्तिपीठ खेमामाई मंदिर आदि को रंगबिरंगी बिजली की रंगीन झालरों और कपड़े से सजाया गया है। नौ दिन तक सिद्धपीठों मेें देवी जागरण दुर्गा सप्तशती का पाठ, शतचंडी यज्ञ होंगे। मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में कोलकाता के सज्जाकार दिनेश की देखरेख में त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी का शैलपुत्री स्वरूप में शृंगार होगा।

108 ज्योति जलाकर देवी जागरण से पहले वैदिक आचार्यों के निर्देशन में शतचंडी महायज्ञ आरंभ होगा। मध्यरात्रि को शयन आरती होगी। मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा के मुताबिक महिला मंडलियों की ओर से भक्ति गीतों और भजनों की प्रस्तुतियां होंगी। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए मंदिर समिति की ओर से स्वयंसेवकों की टीम तैयार की गई है। श्यामजी पाठक के मुताबिक भगवती के प्रथम शैलपुत्री स्वरूप में कल्याणी देवी का शृंगार होगा। देवी चांदी का चेहरा एवं आभूषण धारण कर भक्तों को दर्शन देंगी। मंदिर के कपाट सुबह पांच बजे खुलेंगे। शाम चार बजे से महाभिषेक शुरू होगा। छह बजे से शृंगार दर्शन शुरू होंगे।
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इसके अतिरिक्त सिविल लाइंस स्थित सिद्धेश्वरी गुप्तपीठ, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर मंदिर, अष्टभुजी मंदिर, सिविल लाइंस हनुमत निकेतन के दुर्गा मंदिर, कर्नलगंज कालीबाड़ी, कटरा कालीबाड़ी आदि में कलश स्थापना सहित अनेक अनुष्ठान होंगे।
 
सिद्धपीठ अलोपशंकरी मंदिर में शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में भगवती का पालना सोमवार की मध्यरात्रि बारह बजे बदला जाएगा। मंदिर के प्रधान पुजारी शिवानंद पुरी की देखरेख में पालना बदलने के साथ ही मंदिर में विशेष अनुष्ठान पूजा शुरू होगी। शिवानंद पुरी के मुताबिक श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए निर्वाणी अखाड़े की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है।

मुट्ठीगंज कालीबाड़ी में महालया के उपलक्ष्य में सोमवार को मातृ आरती के बाद मातृ संघ की ओर से महिषासुर मर्दिनी संगीतानुष्ठान होगा। सचिव अरुण कुमार बनर्जी के मुताबिक महालया के साथ ही मंदिर में देवी आराधना के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।

कलश स्थापना का अभिजित मुहूर्त दोपहर 11.40 बजे से लेकर 12.28 बजे तक है। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के महामंत्री आचार्य अविनाश राय के अनुसार अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का संचरण सोमवार की भोर में चार बजकर 25 मिनट से बुधवार की सुबह छह बजकर 24 मिनट तक है। मंगलवार को चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग होने से कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त में या फिर बुधवार की सुबह 6.24 से पहले की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस बार भगवती घोड़े पर सवार होकर आएंगी और डोली में जाएंगी। उन्होंने बताया कि देवी का घोड़े पर आना और डोली पर जाना यानी भगवती की कृपा सभी के लिए नहीं होगी।
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