इलाहाबाद। नासिक कुंभ में हजारों शिष्य गुरुओं से दीक्षा लेने के बाद सनातन धर्म की रक्षा और सेवा करने के लिए मैदान में उतरेंगे। निरंजनी अखाड़ा सात हजार साधुओं को नागा दीक्षा देगा। वहीं जूना, महानिर्वाणी, आवाहन, आनंद, अटल, अखाड़ों में भी हजारों साधुओं को नागा दीक्षा दी जाएगी। कुंभ के पहले शाही स्नान 29 अगस्त, श्रावणी पूर्णिमा से दीक्षित किए जाने वाले साधुआें के लिए साधना एवं तप का विशेष अभ्यास सत्र शुरू हो जाएगा। बता दें, साधु बनने के तीन वर्ष बाद नागा की दीक्षा दी जाती है। ऐसे नागाओं को 13 सितंबर भादों अमावस्या को होने वाले शाही स्नान में शामिल किया जाएगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक नागा दीक्षा पाने वाले साधु फिलहाल हरिद्वार में साधनारत हैं।
दीक्षा के लिए जरूरी व्यास पूजा
नागा बनने वाले शिष्य गोदावरी पर पंचकेश संस्कार के बाद 108 डुबकी लगाएंगे। लंगोटी पहने महात्मा बनने वाले साधु हाथ में पलाश का दंड और पात्र लेकर शिविर में प्रवेश करेेगे। तीन दिनों के उपवास के बाद ही मुंडन संस्कार, गोदावरी किनारे पंचकेश संस्कार, पंच गव्य से शुद्धिकरण और फिर यज्ञोपवीत संस्कार किया जाएगा। इसी क्रम में पितृ और देव ऋण उतारने के लिए नान्दी श्राद्ध किया जाएगा। निरंजनी अखाड़े के महंत आशीष गिरि कहते हैं, नागा बनने को अडिग रहने वाले को ही दीक्षा दी जाती है। नागा बनने वाले साधुओं को अपने निर्णय पर पुनर्विचार के लिए तीन दिन और तीन रात का समय दिया जाएगा।