प्रयागराज में प्रतापपुर ब्लाक के छितौना गांव के रहने वाले थे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी। चार भाई और दो बहनों में दूसरे नंबर के नरेंद्र गिरि के पिता जब चार साल के थे तभी उनके पिता ठाकुर भानु प्रताप सिंह अचानक घर छोड़कर लापता हो गए। उनका आज तक पता नहीं चला।
1995 में अचानक हो गए थे लापता
मां सुराजा देवी ने चार वर्ष की अस्था में ही नरेंद्र सिंह उर्फ बुद्धू (नरेंद्र गिरि) को अपने मायके पहुंचा दिया था। नरेंद्र गिरि के नाना सरजू प्रताप सिंह और मामा अभय प्रताप सिंह प्रयागराज में ही धनुपुर ब्लाक के अंतर्गत आने वाले गिर्दकोट के रहने वाले थे। अपने मामा के यहां कुछ दिन रहने के बाद 1983 में नरेंद्र गिरि ने अपने मामा का घर छोड़ दिया और इधर उधर घूमने फिरने लगे। कुछ दिन बाद 1995 में वह अचानक लापता हो गए। काफी खोजबीन करने के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चला।
सुसाइड नोट में लिखा घर से कोई संबंध नहीं
वर्ष 2004 में बाघंबरी गद्दी का पीठाधीश्वर एवं संगम तट पर स्थित बड़े हनुमान मंदिर (लेटे हनुमानजी) के महंत बन गए। गांव में इन्हें लोग नरेंद्र उर्फ बुद्धू सिंह के नाम से जानते हैं। उनकी मौत की खबर से गांव सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनकी बहन और परिवार के तमाम सदस्य मठ पहुंच गए। हालांकि सुसाइड नोट में महंत ने यह लिखा है कि उनका घर से कोई संबंध नहीं था न ही उन्होंने घर पर एक भी पैसा दिया है।