इस पर भगवान देवी के पति अजय पाल ने सीजीएम बरेली के समक्ष 156 (3) के तहत आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग पर अर्जी दाखिल की। 24 नवंबर 22 को जब उसके पति अदालत जा रहे थे तो नारकोटिक्स अधिकारियों ने नशीला पदार्थ मिलने का आरोप लगाकर उन्हें जेल भेज दिया।
याचियों की ओर से कोर्ट के समक्ष तर्क दिया गया कि उसने प्रतिवादी अजय पाल को सरताज नामक युवक की निशानदेही पर गिरफ्तार किया। क्योंकि सरताज ने आरोप लगाया कि वह प्रतिबंधित पदार्थ अजय पाल से खरीदता था। उसके खिलाफ कई मामले पहले से दर्ज हैं। मादक पदार्थ हेरोइन बेचने में पकड़ा जा चुका है।
याची नारकोटिक्स विभाग के कर्मचारी हैं और अपने कर्तव्यों का निवर्हन कर रहे थे। प्रतिवादियों की ओर से उन्हें जानबूझकर फंसाया गया है। जवाब में सरकारी अधिवक्ता ने याचिका रद्द करने का विरोध किया। कहा कि एसएसपी बरेली की जांच में आरोप सही पाए गए हैं। जब याचियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो गई तो उसके बाद प्रतिवादियों के खिलाफ मुकदमा लिखा गया। लिहाजा, याचिका खारिज किए जाने योग्य है।