इस साल के अंत या अगले वर्ष की शुरुआत में दुनिया को एक नई नैनोशीट ट्रांजिस्टर टेक्नोलॉजी मिलने जा रही है, जिससे आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन होने की उम्मीद है। मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी), प्रयागराज के पूर्व छात्र कमल रुद्र समेत दुनिया के तमाम वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।
कमल रुद्र के अब तक छह शोध यूएस पेटेंट ऑफिस में फाइल हो चुके हैं। वर्ष 2019 में एमएनएनआईटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक करने के बाद रुद्र एक शोध के सिलसिले में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलुरू से जुड़े। इसके बाद यूएसए पहुंचे और दुनिया के शीर्ष 20 विश्वविद्यालयों में शामिल यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन से मास्टर्स की डिग्री हासिल की।
रुद्र इन दिनों न्यूयॉर्क, यूएसए में इंटरनेशनल बिजनेस मशीन (आईबीएम) की रिसर्च शाखा में बतौर रिसर्च इंजीनियर काम कर रहे हैं। रुद्र बताते हैं कि वह दो नैनो मीटर की नैनोशीट ट्रांजिस्टर टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, जिसका उपयोग सेमीकंडक्टर चिप में किया जाएगा। वह जिस स्तर पर शोध कर रहे हैं, वह मानव के एक बाल की मोटाई से तकरीबन एक लाख गुना पतला है।
इस टेक्नोलॉजी वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण वर्ष 2025 के अंत या अगले साल की शुरुआत में बाजार में आने की उम्मीद है, जिससे एआई व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की क्षमता बढ़ेगी और प्रदर्शन व कम्युनिकेशन बेहतर होगा। एआई के साथ डाटा सेंटर, स्मार्टफोन, गेमिंग आदि के क्षेत्र में आम लोगों को इसका फायदा मिलेगा।