वैक्टीरिया जनित बीमारियों पर करेगा नियंत्रण
शोध के दौरान इकोलाई, इफेक्लिस, एसोरियस और स्टाइफी नाम के बैक्टीरिया पर नैनो फ्यूड से टेस्ट किया गया। यह बैक्टीरिया सबसे अधिक प्रभावशाली माने जाते हैं। एक दिन के बाद परिणाम सामने आया कि बैक्टीरिया के बढ़ने की रफ्तार पूरी तरह से थम गई है और बैक्टीरिया खत्म होने लगे हैं। शोध में यह बात सामने आई कि गोल्ड, प्लेटिनम और कॉपर के नैनो पार्टिकल्स से तैयार किया गया नैनो फ्ल्यूड बैक्टीरिया जनित कई बीमारियों को प्रभावशाली तरीके से नियंत्रित कर सकता है।
इन बैक्टीरिया से त्वचा, आंत संबंधी बीमारियां, टाइफाइड, डायरिया, मिर्गी, जोड़ों के दर्द, उल्टी-दस्त, पेट में दर्द जैसी बीमारियां होती हैं। इस शोध में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) के प्रो. गोपाल नाथ और उनके शोधार्थी वीरेंद्र बहादुर का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आम लोगों को फायदा पहुंचाने की कवायद
आम लोगों को इस शोध का लाभ मिल सके, इसके औद्योगिक उत्पादन के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं और कुछ फार्मास्युटिकल कंपनियों से भी संपर्क किया गया है। हालांकि आम एंटीबायोटिक के विकल्प के तौर पर नैनो फ्ल्यूड का इस्तेमाल कुछ महंगा पड़ेगा। लोगों को सस्ती दर इसका फायदा मिल सके, इसके लिए प्रचुर मात्रा में उत्पादन की जरूर पड़ेगी। शोध में शामिल रहे डॉ. नवनीत ने बताया कि अब इस दिशा में भी शोध हो रहा है कि नैनो फ्ल्यूड में ऐसे नैनो पार्टिकल्स शामिल किए जाएं, जो और अधिक सस्ते हों।
इको फ्रेंडली है नैनो फ्ल्यूड का उपयोग
नैनो मैटेरियल आधारित नैनो फ्ल्यूड का संश्लेषण माइक्रोवेव विकिरण की मदद से रासायनिक प्रक्रिया से किया गया। इस प्रक्रिया में पाया गया कि माइक्रोवेव विकिरण पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं है और इससे ऊर्जा की खपत भी कम होती है।