जैसा की ‘अमर उजाला’ ने 23 दिसंबर के अंक में संभावना जताई थी कि पूर्व मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी बहुत जल्द कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा सकते हैं, सही साबित हुई। बसपा छोड़ पहले कांग्रेस और अब भाजपा में शामिल हुए नंदी कांग्रेस में कभी घुलमिल नहीं सके। केंद्रीय नेताओं के इलाहाबाद आने में तो सक्रिय नजर आते थे लेकिन स्थानीय स्तर पर आयोजित पार्टी कार्यक्रमों से उन्होंने दूरी बनाकर रखी।
नंदी ने 23 दिसंबर को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जब कांग्रेस से अलग स्वतंत्र रूप से रैली का आयोजन करने और इसमें मुख्य अत्रिथि के रूप में भाजपा के करीबी सांसद सुभाष चंद्रा के आने की घोषणा की थी, उसी वक्त उनके कांग्रेस छोड़कर जाने के संकेत मिल गए थे। पिछले साल इंदिरा गांधी के जन्म शती समारोह के दौरान 21 नवंबर को स्वराज भवन में जब सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी एक साथ आए थे, तब नंदी और उनकी पत्नी मेयर अभिलाषा गुप्ता भी वहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंच थे।
इस कार्यक्रम में पुराने और दिग्गज कांग्रेसियों का मजमा लगा था लेकिन उस भीड़ में भी नंदी अलग-थलग ही दिखाई दिए। हालांकि कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मंडलीय प्रचार समिति का प्रभारी बनाया था लेकिन पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और नंदी के बीच दूरी बरकरार रही। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस माह भर पहले से इसके लिए तैयार थी। नंदी का पार्टी छोड़कर जाना कोई हैरत वाली बात नहीं है।