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नागा साधुओं के भी होते हैं आमजन जैसी शौक, महानिर्वाणी अखाड़े के साधु को है अनोखा शौक

Sun, 13 Jan 2019 12:57 AM IST
Asif Iqbal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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नागा साधि - फोटो : अमर उजाला, प्रयागराज
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यदि आपको कोई नागा संन्यासी हाईस्पीड में बाइक या कार चलाता दिखे तो जाहिर है कुछ देर के लिए नजरें टिक जाएंगी और आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि ऐसा भी हो सकता है। लेकिन, जब आपकी नजर श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के नागा संन्यासी सोमगिरि महाराज पर पड़ेगी तो कुछ ऐसा ही अनुभव होगा।
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सोमगिरि हैं तो नागा संत, लेकिन इन्हें फुल स्पीड में कार और बाइक चलाने का शौक है। सोमगिरि महाराज कुंभ मेले में आए हुए हैं और मौका पड़ने पर अपना शौक भी पूरा कर लेता हैं।

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उनके हाथ में स्टेयरिंग या हैंडल आई तो फिर वो धूम मचा देते हैं। बताते हैं कि उन्होंने 2004 में पालीटेक्निक डिप्लोमा किया और फिर संन्यास की ओर बढ़ चले। लगातार चौदह साल से वैराग की भावना से तप-साधना कर रहे हैं।  उन्हें गाड़ियां हाईस्पीड में चलाने का शौैक है और बचपन से ही रिस्क लेने में उन्हें मजा आता है। नागा बनने के बाद भी यह शौक उनका बना हुआ है और ये उन्हें विरासत में मिला है। सोमगिरि के पिता भी हर काम को जोखिम भरे अंदाज में करते थे।
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हरिद्वार स्थित उनके आश्रम से कहीं बाहर सामान लाने जाते समय उनको ही बोला जाता है। क्योंकि उनके इस हाईस्पीड शौक के  बारे में अखाड़े के सभी सदस्यों को पता है। सोमगिरि युद्धकला में भी निपुण हैं। भाला, लाठी, तलवार, कुश्ती आदि में महारथ हासिल है। उन्होंने यह भी बताया कि नागा बनने का उनका कोई लक्ष्य नहीं था, वह शिव के प्रति आकर्षित थे। शिवसाधना करते हुए नागा साधु बन गए।
 
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