बारिश और ओलावृष्टि से पूरी फसल बर्बाद हो गई। बेचने क्या, खुद खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा। परिवार और खेत की हालत देख बदहाल किसान पन्ना लाल की आत्मा जीते-जी तड़पती रही। सदमे में आकर किसान ने दम तोड़ दिया। परिवार वालों के पास इतना पैसा भी नहीं था कि उसका दाह संस्कार करा पाते। किसान के शव को दफना दिया गया। खबर फैली और हड़कंप मचा तो प्रशासनिक अफसरों की नींद टूटी। डीएम से लेकर लेखपाल तक किसान के घर पहुंचे। परिवार वालों को मनाकर कब्र से किसान का शव निकलवा कर पोस्टमार्टम कराया। परिवारों वालों को आश्वासन दिया कि मौत की वजह स्पष्ट होने पर उन्हें किसान दुर्घटना की बीमा का लाभ मिल सकता है। ऐसा होगा या नहीं, यह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मालूम होगा लेकिन यह तय है कि किसान का पोस्टमार्टम कराकर प्रशासनिक अफसर अपने ऊपर लगे लापरवाही के ठप्पे से काफी हद तक मुक्त हो जाएंगे।
फूलपुर तहसील क्षेत्र के सोरांव थानान्तर्गत सरायलीलाधर उर्फ बरचनपुर गांव निवासी पन्ना लाल (45 वर्ष) के पास तकरीबन 13 बिस्वा जमीन थी। बारिश में फसल इस कदर बर्बाद हुई कि खुद के लिए भी कुछ नहीं बचा। सदमे से किसान की मौत हो गई और 24 घंटे बाद भी अफसर इस घटना से अनजान रहे। तंगहाली से जूझ रहे परिवार के लोग किसान का दाह संस्कार भी नहीं करा सके और फाफामऊ में गंगा किनारे उसे दफना दिया। शुक्रवार को खबर फैली। हड़कंप मचा तो प्रशासनिक अफसरों की नींद टूटी। सुबह-सुबह ही लेखपाल और एसडीएम मौके पर पहुंच गए। बाद में डीएम भवनाथ सिंह खुद किसान के घर पहुंचे और किसान की पत्नी रेखा एवं 12वीं में पढ़ रही बेटी पिनका से घटना के बारे में जानकारी ली। किसान के परिवारीजनों से कहा गया कि वे शव का पोस्टमार्टम कराते हैं तो उन्हें किसान दुर्घटना बीमा का लाभ मिल सकता है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिजनों वालों से पोस्टमार्टम की अनुमति लेने के लिए जरूरी अभिलेखों में दस्तखत कराए गए। अफसर वहां से लौटे तो कुछ देर बाद नायब तहसीलदार निखिल शुक्ला, चौकी इंचार्ज कुरगांव राम मनही यादव उस जगह पर पहुंचे, जहां किसान को दफनाया गया था। उन्होंने शव निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।