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बिना पूर्व योजना, अचानक आवेश-झगड़े में हुई हत्या गैर इरादतन हत्या है : हाईकोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी पूर्व योजना के अचानक झगड़े और आवेश में हुई हत्या गैर इरादतन के तहत आती है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपियों की हत्या की सजा को घटाकर गैर इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने महेश सिंह व अन्य की याचिका पर दिया।
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मामले के मुताबिक, आठ जुलाई 2016 को आरोपी महेश सिंह व अन्य के खिलाफ शाहजहांपुर के रोजा थाने में हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई। अभियोजन के अनुसार पंचायत चुनाव के दौरान मृतक का आरोपियों के परिवार से संबंध बना था। मृतक ने आरोपियों को 1.5 लाख रुपये उधार दिए थे। पैसे वापस मांगने पर उसे घर बुलाया गया। जहां विवाद के दौरान आरोपियों ने गोली मारकर और धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी। ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही एक लाख का जुर्माना लगाया था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन की कहानी संदेह से परे साबित नहीं हुई है। घटना पूर्व नियोजित नहीं थी बल्कि अचानक विवाद के दौरान हुई। इसलिए यह मामला गैर इरादतन हत्या का बनता है। वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से मृतक को बुलाकर सामूहिक रूप से उसकी हत्या की। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान और चिकित्सीय साक्ष्य अभियोजन की कहानी की पुष्टि करते हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला सही है और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों के आधार पर साबित होता है कि घटना अचानक झगड़े और आवेश में हुई। इसमें पूर्वनियोजन का अभाव है। यह आपराधिक मानव वध का मामला है जो हत्या की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने आरोपियों को पहले से जेल में काटी गई सजा के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जुर्माना यथावत रखा।
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