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High Court : प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही का मेडिकल साक्ष्य से मेल नहीं खाने पर हत्या के आरोपी बरी

Wed, 19 Aug 2026 06:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही का मेडिकल साक्ष्य से मेल नहीं खाने पर हत्या के मामले में दो अभियुक्तों संतराम और रामलाल को बरी कर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही का मेडिकल साक्ष्य से मेल नहीं खाने पर हत्या के मामले में दो अभियुक्तों संतराम और रामलाल को बरी कर दिया है। कहा कि यदि अभियोजन पक्ष की कहानी की उत्पत्ति और घटना का तरीका संदिग्ध हो तो केवल दुश्मनी या आशंका के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया है। शाहजहांपुर निवासी अपीलकर्ताओं के खिलाफ पुवायां थाने में जनवरी 1984 में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। रामचंद्र नामक व्यक्ति की हत्या का आरोप था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पहले बंदूक से गोली चलाई, जिससे रामचंद्र गिर गया। इसके बाद भाले व चाकू से हमला किया गया। ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 1984 को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टर की चिकित्सकीय जांच में मृतक के शरीर पर चाकू के 24 घाव तो मिले, लेकिन बंदूक की गोली या भाले की चोट का कोई निशान नहीं मिला। कोर्ट ने पाया कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और मेडिकल साक्ष्यों के बीच गंभीर विरोधाभास है। इससे साबित होता है कि घटना के समय साक्षी मौके पर मौजूद नहीं थे। 

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