मुस्लिम मतों के बदलते रुख ने कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। प्रचार अभियान के दौरान मुख्य लड़ाई से बाहर बताई जा रही कांग्रेस अब सीधी लड़ाई में शामिल हो गई है। बदले समीकरणों के बीच कांग्रेस को पार्षदी के चुनाव में भी बेहतर परिणाम की उम्मीद जगी है।
मुस्लिम मतों के बदलते रुख ने कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। प्रचार अभियान के दौरान मुख्य लड़ाई से बाहर बताई जा रही कांग्रेस अब सीधी लड़ाई में शामिल हो गई है। बदले समीकरणों के बीच कांग्रेस को पार्षदी के चुनाव में भी बेहतर परिणाम की उम्मीद जगी है।
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पिछले चुनाव में कांग्रेस के महापौर के प्रत्याशी विजय मिश्रा 64579 वोट पाकर तीसरे स्थान पर थे। वह उपविजेता रहे सपा के विनोद चंद्र दुबे से मात्र 3334 मतों से पीछे रह गए थे। इसके अलावा 11 पार्षद भी चुने गए थे। वहीं सपा के सबसे अधिक 24 तथा भाजपा के 22 पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसके बावजूद इस बार बड़े नेताओं ने पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ने में रुचि नहीं दिखाई, लेकिन मतदान के दौरान पूरा समीकरण ही बदलता दिखा।
मुस्लिम मतदाताओं के एक तबके की सपा के प्रति नाराजगी कांग्रेस के लिए बड़ी उम्मीद बनती दिख रही है। सपा से नाराज मुस्लिमों का एक वर्ग कांग्रेस की बात कह रहा था। इसका फायदा महापौर एवं पार्षदी के अलावा अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भी होने की बात कही जा रही है।