शहर में कई परिवार जर्जर मकानों में जिंदगी बिता रहे हैं। इसी बीच नगर निगम की तरफ से कराए गए एक सर्वे में करीब 222 जर्जर मकानों को चिह्नित किया गया है। इनमें 1200 से अधिक परिवार रह रहे हैं।
शहर में कई परिवार जर्जर मकानों में जिंदगी बिता रहे हैं। इसी बीच नगर निगम की तरफ से कराए गए एक सर्वे में करीब 222 जर्जर मकानों को चिह्नित किया गया है। इनमें 1200 से अधिक परिवार रह रहे हैं। इसके बाद नगर निगम ने नोटिस भेजकर इन मकानों की मरम्मत कराने के लिए कहा है।
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नियमों के आधार पर गुणवत्तापूर्ण बने भवनों की आयु 100 से 120 वर्ष तक रहती है। वर्तमान में शहर में 150 वर्ष से भी अधिक पुराने जर्जर भवनों में लोग रह रहे हैं। शाहगंज की घटना से पहले भी जर्जर मकान की वजह से कई घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें वर्ष 2022 में मुट्ठीगंज हटिया चौराहा स्थित जर्जर मकान का छज्जा गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई थी। करीब आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
इसी तरह, शाहगंज में भी जर्जर मकान के मलबे में दबने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कब्जेदारी को लेकर दो पक्षों में विवाद के कारण कार्रवाई नहीं की जाती। कई जर्जर भवनों का मामला कोर्ट में भी लंबित है। मुख्य अभियंता दिनेश चंद्र सचान ने बताया कि जर्जर भवनों को चिह्नित करके नोटिस जारी की गई है। जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी।