इलाहाबाद। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की करबला में शहादत की याद में दसवीं मुहर्रम को शहर के तमाम इलाके गमे हुसैन में डूबे रहे। बुधवार को रवायत के मुताबिक बुड्ढा और बड़ा ताजिया सहित शहर के अलग-अलग मोहल्लों के इमामबाड़ों से ताजियों के फूल अकीदत और एहतराम के साथ करबला में दफनाए गए। इसके तहत शहर के अलग-अलग 38 मोहल्लों के ताजियादारों की ओर से तकरीबन 68 ताजिया, अलम, मेहंदी आदि के फूल करबला पहुंचे। सिर पर हरी और लाल पट्टियां बांधे अकीदतमंद अलम, ताजिया, मेहंदी के फूलों को लेकर जब करबला की ओर चले तो इमामबाड़ों से लेकर करबला तक ‘या अली, या हुसैन’ की सदाएं गूंजतीं रहीं। ताजियादारों ने एक बार फिर शहर के अमन-चैन के मद्देनजर जुलूस न निकालने के फैसले पर अमल करते हुए अकीदत के फूलों को गाड़ियों में रखकर करबला पहुंचाया।
रवायतन पहले बुड्ढा और फिर बड़ा ताजिया सहित बाकी इमामबाड़ों के फूल करबला में दफनाए गए। फूलों के साथ बुड्ढा ताजिया के अकीदतमंद नूरउल्लाह रोड से खुल्दाबाद चौराहे पर पहुंचकर करबला की ओर मुड़े। वहीं जानसेनगंज स्थित बड़ा ताजिया इमामबाड़े से बड़ा ताजिया के फूलों के साथ अकीदतमंद कोतवाली, नखासकोहना, खुल्दाबाद चौराहा होकर करबला पहुंचे। इस मौके पर मुतवल्ली रेहान खां, सचिव इमरान खां, वसीम खान, मुबारक अली, वजीर खां, जावेद सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद शरीक हुए। अबकी ताजियों से फूलों को निकालकर गाड़ियों पर रखा गया था, चौकियां इमामबाड़े पर ही रहीं।
रसूलपुर के चार, करेली के आठ मेहंदी के फूल, कोलहन टोला की मेहंदी, अलम के फूल, रानीमंडी के दो, गढ़ीसराय के चार, कालाडांडा, बरनतला, रोशनबाग के एक-एक, बुड्ढा ताजिया, कीडगंज, अकबरपुर के तीन-तीन, हटिया, लखनपुर, बख्शीबाजार, बक्शीमोढ़ा, मिर्जा गालिब रोड आदि के अलम, ताजिया, मेहंदी केफूल करबला पहुंचे। गुलामाने पंजतन एकता कमेटी की ओर से परवेज आलम अंसारी, जावेद अख्तर, जावेद अंसारी आदि की देखरेख में लकी की मेहंदी के फूलों को करबला ले जाकर दफनाया गया। सुबह से ही शुरू हुआ करबला पहुंचने का सिलसिला शाम तक जारी रहा।
0 जियारत, नज्र, फातेहा को उमड़े अकीदतमंद
अलम, ताजिया, मेहंदी, झूलों के फूलों को करबला में दफनाने से पहले उनकी जियारत के लिए इमामबाड़ों पर अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा। हर कोई बोसा लेने के लिए बेताब दिखा। मंगलवार शाम से ही इमामबाड़ों के बाहर हुसैन के शैदाइयों की कतारें लगी रहीं। इंतजाम में इलाहाबाद ऐतिहासिक मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष असरार नियाजी,
कमेटी उपाध्यक्ष मजहरुल हक, सचिव मुहम्मद हफीज खां और ऐतिहासिक मुहर्रम कमेटी के निसार खां, डॉ.सैयद मुहम्मद असलम आदि जुटे रहे।
अलग-अलग करबला में भी
अकीदत के फूल सुपुर्दे खाक
इलाहाबाद। चकिया स्थित करबला के अतिरिक्त अलग-अलग करबला में भी संबंधित क्षेत्रों के इमामबाड़ों के फूलों को दफनाया गया। हाजी अजमतउल्ला निजामी की सरपरस्ती में शाही इमामबाड़ा से मासूम असगर अली के झूले के फूल टूटी नीम करबला में दफनाए गए। मोहम्मद नईम अख्तर सिद्दीकी, खलील, शकील आदि ने मिट्टी दी, फातेहा पढ़ी, तबर्रुकात बांटे।
इसी तरह धूमनगंज, कुशवाहा मार्केट के करीब स्थित करबला और नीमसराय, बड़ा गयासुद्दीनपुर,छोटा गयासुद्दीनपुर, बेगम सराय, बमरौली के ताजियादारों ने केंद्रांचल करबला, दरियाबाद के ताजियादारों ने दरियाबाद करबला, सदर बाजार के ताजियादारों ने अशोकनगर करबला, कर्नलगंज के ताजियादारों ने ताजिए के फूलों को कर्नलगंज में दफनाया।
करबला के करीब लगा मेला
अकीदत के फूलों को करबला में दफनाने के दौरान करबला के करीब सड़क के दोनों किनारों पर बच्चों के खेल-खिलौनों, खाने-पीने की चीजों की दुकानें लगीं। बच्चों ने तरह-तरह की कागज की तलवारें और टोपियां खरीदीं। खाने-पीने की दुकानों पर महिलाएं, बच्चे जुटे रहे।