इलाहाबाद (ब्यूरो)। सर्किट हाउस में बृहस्पतिवार सुबह खासा बवाल हो गया। आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के वहां पहुंचे भदोही सांसद वीरेंद्र सिंह ‘मस्त’ और उनके समर्थकों ने रिसेप्शन पर बैठे कर्मचारी को कमरा न खोलने पर धमकाया। कर्मचारी नहीं माना तो समर्थकों ने उसका कॉलर पकड़ लिया और राइफल सटा दी। कर्मचारी को सर्किट हाउस में दो कमरे खोलने पड़े। हालांकि बाद में इसके लिए कर्मचारी को अफसरों ने फटकार लगाई, लेकिन उसका तर्क था कि आत्मरक्षा के लिए मजबूरी में दो कमरे खोलने पड़े। फिलहाल कुछ देर बाद ही नोटिस बोर्ड पर सांसद के नाम कमरा आवंटन की सूचना चस्पा कर दी गई, लेकिन लिखापढ़ी में आवंटन नहीं हुआ।
सांसद वीरेंद्र सिंह अपने आठ समर्थकों के साथ बृहस्पतिवार सुबह छह बजे सर्किट हाउस पहुंचे। उस वक्त कर्मचारी राजकुमार पांडेय रिसेप्शन पर मौजूद था। सांसद ने कमरा खोलने के लिए कहा, लेकिन कर्मचारी ने यह कहकर मना कर दिया कि कोई पूर्व सूचना नहीं है और न ही लिखित रूप से कोई आवंटन है। कर्मचारी ने सांसद को अफसरों से फोन पर बात करने की सलाह दी। इस पर सांसद भड़क गए। कर्मचारी का आरोप है कि पहले सांसद ने धमकाया और बाद में समर्थकों ने उसका कॉलर पकड़कर रिवॉल्वर सटा दी। ऐसे में उसे आत्मरक्षा के लिए कमरा नंबर-12 (कृष्णा), कमरा नंबर-13 (सरस्वती) सांसद और उनके समर्थकों के लिए खोलना पड़ा जबकि सरस्वती पहले से किसी अफसर के नाम बुक था।
फिलहाल सांसद और उनके समर्थक तीन-चार घंटे रुककर वहां से चले गए। इस बीच कर्मचारी ने सर्किट हाउस के अधिकारी एवं पीडब्ल्यूडी के जेई राजेश श्रीवास्तव को फोन पर पूरी जानकारी दी। बाद में प्रशासनिक अफसरों तक मामला पहुंचा। अफसरों ने कर्मचारी को फटकार लगाई कि बिना आदेश के कमरा कैसे खोल दिया। इस बारे में जब एडीएम सिटी एसके शर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि वह दिनभर जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव में व्यस्त थे, घटना की सूचना उन्हें नहीं मिली है। उधर, सांसद का कहना है कि यह बात सही है कि वह एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अचानक इलाहाबाद पहुंचे। उन्होंने कर्मचारी को अपना परिचय भी दिया। कर्मचारी से बहस हुई लेकिन धमकाने, कर्मचारी का कॉलर पकड़ने और उसे रिवॉल्वर सटाने का आरोप गलत है।