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मातृभाषा पर आधारित हो न्याय पद्धति

Sun, 28 Feb 2016 01:25 AM IST
allahabad
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि विभाग की ओर से ‘विधि एवं न्याय के क्षेत्र में भारतीय भाषाएं’ विषय पर शनिवार को शुरू दो दिनी राष्ट्रीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने विधियां और न्याय पद्धति को राष्ट्रभाषा एवं भारत की अन्य भाषाओं पर अधिकाधिक आधारित करने की वकालत की।
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सीनेट हाल में आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश ज्ञान सुधा मिश्रा ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी राष्ट्रभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं को वह स्थान प्राप्त नहीं है, जिसकी वे सहज अधिकारिणी हैं। भारतीय भाषाओं की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजना से वस्तु स्थिति को बदलने में मदद मिलेगी। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हंगलू ने कहा कि छोटे-बड़े अनेक देशों ने अपनी मातृभाशा में ही विधि एवं न्याय व्यवस्था स्थापित करके महत्वपूर्ण प्रगति की है।
 आवश्यकता है कि अंग्रेजी के स्थान पर हिन्दी, उर्दू, तमिल, तेलगू, बांग्ला, कन्नड़, मलयाली आदि भाषाओं को प्रयोग में लाया जाए। ताकि, सामान्य आदमी को उसकी भाषा में न्याय मिल सके। भारतीय भाषा अभियान के संयोजक अरुण भारद्वाज ने कार्यक्रम के बारे में बताया। शिक्षाविद अतुल कोठारी ने विषय प्रवर्तन किया। 
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अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आरके चौबे ने भारतेंदु, सुब्रमण्यम भारतीय जैसे साहित्यकारों से प्रेरणा लेने की बात कही, जिन्होंने अपनी भाषा में ही उन्नति की बात कही। सेमिनार को अतिरिक्त महान्यायवादी अशोक मेहता, सहायक महान्यायवादी एन.नागरेश आदि ने भी न्यायालयों में हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाने की अनिवार्यता पर बल दिया। संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर राकेश खन्ना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ.जेपी मिश्रा ने संचालन किया। 
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