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Prayagraj : मां ने अपनी किडनी देकर बचाई बेटे की जान, प्रयागराज में हुआ पहला गुर्दा प्रत्यर्पण

Wed, 25 Mar 2026 07:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज में पहला सफल गुर्दा प्रत्यर्पण बुधवार को एसआरएन अस्पताल में किया गया। मां ने अपनी किडनी देकर बेटे की जान बचाई है। गुर्दा प्रत्यर्पण की प्रक्रिया करीब एक माह से चल रही थी।
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गुर्दा प्रत्यर्पण। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मोती लाल नेहरू (एमएलएन) मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजी और किडनी रोग विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जिले का पहला गुर्दा प्रत्यारोपण करके इतिहास रच दिया है। बुधवार को करीब तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद मरीज और दानकर्ता पूरी तरह से स्वस्थ हैं। अब एक हफ्ते तक दोनों को चिकित्सकों की गहन निगरानी में रखा जाएगा। प्रत्यारोपण के लिए हनुमानगंज निवासी 21 वर्षीय युवक व दानकर्ता 49 वर्षीय उसकी मां को करीब तीन दिन पहले एसआरएन अस्पताल में भर्ती किया गया। इस दौरान गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए सभी जांचें व प्रोटोकॉल पूरे किए गए।

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बुधवार दोपहर करीब दो बजे यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिलीप चौरसिया, प्रोफेसर डॉ. श्रीश मिश्रा, किडनी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद गुप्ता, किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या गुप्ता व डॉ. संतोष मौर्या ने सर्जरी शुरू की। करीब तीन घंटे तक चली सर्जरी के बाद मरीज का यूरिन सही मात्रा में पास होता दिखा।



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इसी वर्ष जनवरी में होना था प्रत्यारोपण

एमएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व गुर्दा प्रत्यारोपण कमेटी के अध्यक्ष डॉ. वीके पांडेय की अध्यक्षता में हुई किडनी ट्रांसप्लांट ऑथराइज्ड कमेटी की बैठक में मंजूरी मिलने के बाद इसी वर्ष जनवरी में प्रत्यारोपण किया जाना था। हालांकि, मरीज को संक्रमण होने की वजह से प्रत्यारोपण को दो बार टालना पड़ा।

17 सितंबर 2025 को मिला था लाइसेंस

स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय परिसर में स्थित पीएमएसएसवाई बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर गुर्दा प्रत्यारोपण यूनिट की स्थापना की गई थी, लेकिन एसजीपीजीआई की तरफ से यूनिट को मंजूरी मिलने में पांच साल का लंबा समय लग गया। 30 अगस्त 2025 को एसजीपीजीआई की तीन सदस्यीय कमेटी ने यूनिट का निरीक्षण किया था। इसके बाद 17 सितंबर 2025 को एसजीपीजीआई की तरफ से यूनिट को गुर्दा प्रत्यारोपण का लाइसेंस मिल गया।

चिकित्सकों ने उठाया प्रत्यारोपण का खर्च

हनुमानगंज निवासी मरीज किसान परिवार से है। प्रत्यारोपण के लिए करीब छह लाख रुपये जुटा पाना परिवार के लिए मुश्किल था। बीए की पढ़ाई पूरी कर चुके मरीज के दोनों गुर्दे दो साल पहले खराब हो गए थे। इसके बाद से मरीज की डायलिसिस चल रही थी। डॉ. सौम्या गुप्ता मरीज का उपचार कर रही थीं। वहीं, जब प्रत्यारोपण में आर्थिक समस्या की बात सामने आई तो डॉ. अरविंद गुप्ता, डॉ. दिलीप चौरसिया, डॉ. सौम्या गुप्ता, डॉ. संतोष मौर्या और डॉ. श्रीश मिश्रा ने प्रत्यारोपण में खर्च होने वाले छह लाख रुपये जुटाए। सफल सर्जरी के बाद मरीज के पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने चिकित्सकों को धन्यवाद दिया।
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क्या बोले  चिकित्सक

उत्तर प्रदेश की पांचवीं किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट का लाइसेंस मिलने के बाद यह पहला सफल प्रत्यारोपण है। इसके लिए मैं पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं देता हूं। अब किडनी के मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा। - डॉ. वीके पांडेय, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज

लखनऊ के एसजीपीजीआई में प्रतीक्षा सूची लंबी होने के बाद यह मरीज करीब एक साल पहले डॉ. सौम्या गुप्ता के संपर्क में आया था। कई रुकावटों के बाद मरीज का सफल प्रत्यारोपण हुआ। करीब एक हफ्ते तक मरीज को गहन निगरानी में रखा जाएगा। तीन महीने पहले से प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू कर दी गई थी। - डॉ. अरविंद गुप्ता, अध्यक्ष, किडनी रोग विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज

प्रत्यारोपण में सबसे बड़ी चुनौती मरीज व दानकर्ता को संक्रमण से बचाने की होती है। इसको ध्यान में रखकर सर्जरी की गई। अब मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए अन्य जिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। - डॉ. दिलीप चौरसिया, अध्यक्ष, यूरोलॉजी विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज

प्रयागराज व आसपास के जिलों के मरीजों को मिला लें तो करीब 500 गुर्दा रोगियों की डायलिसिस चल रही है। वहीं, सात मरीजों ने प्रत्यारोपण के लिए आवेदन कर रखा है। ऐसे में अगर सरकार आर्थिक सहयोग करे तो किडनी के मरीजों को काफी लाभ मिल सकता है। - डॉ. संतोष मौर्या, किडनी रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल
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