इलाहाबाद। पूरी दुनिया को सेवा का पाठ पढ़ाने वाली मदर टेरेसा का संगमनगरी से भी गहरा लगाव रहा। इसी सिलसिले में वह पहली बार वर्ष1980 में यहां म्योराबाद स्थित निर्मला शिशु सदन की शुरुआत के लिए आई थीं। मदर को वर्ष 1983 में दोबारा आना हुआ तो उन्होंने सेवाक्षेत्र को और विस्तार देने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद शिशु सदन बेसहारा बच्चों खासकर बेटियों का ठौर बन गया। म्योराबाद चर्च के करीब स्थित शिशु सदन ने उनकी स्मृतियां सुरक्षित हैं। शिशु सदन के भीतरी बरामदे में लगी सिस्टरर्स के साथ उनकी फोटो आज भी उनकी याद दिलाती है। सदन में प्रवेश करते ही उनकी करुणामयी प्रतिम मानव सेवा का संदेश देती है।
मदर टेरेसा अपने सेवा मिशन के तहत जब इलाहाबाद आई तो सेंट जोसेफ कैथिड्रल में उनका भव्य स्वागत किया गया था। पूरे शहर में भी कई कार्यक्रमों के तहत उनका स्वागत किया गया। उनके सम्मान में हुई सभा का संचालन पीडी टंडन ने किया था। मदर को देखने और उनसे मिलने वालों में सभी धर्म के लोग शामिल थे। सुपीरियर सिस्टर जीवन रॉस ने कहा, मदर को संत का दर्जा मिलने से हमारी प्रतीक्षा पूरी हुई। आज का दिन हमारे लिए बेहद खास है। हम बीते अठारह वर्षों से इसी दिन के इंतजार में थे। उन्होंने अपने कार्यों से देश को ऊंचाई प्रदान की। उन्होंने हमें सेवा का संस्कार दिया है। उनके बताए रास्ते पर चलकर बिना थके सेवा का कार्य कर रहे हैं। निर्मला शिशु सदन में फिलहाल 35 बेटियां हैं जिनकी बेहतर परवरिश की जा रही है।
मदर के सेवाकार्यों को मिलेगा विस्तार
मदर टेरेसा ने उनकी सेवा की जिन्हें उनके परिवार और समाज ने ठुकरा दिया था। उनके सेवा कार्य को आगे बढ़ाने का दायित्व हम सभी का है। इलाहाबाद प्रांत की ओर से असहाय लोगों के लिए घर बनाया जाएगा। इसके लिए चैरिटी आफ मिशन के लोगों से बातचीत हो चुकी है। एक वर्ष में इसे शुरू कर दिया जाएगा। कोशिश रहेगी कि सड़कों पर लाचारी भरे दिन किसी को न बिताने पड़ें।
बिशप रॉफी मंजली, रोमन कैथोलिक इलाहाबाद धर्मप्रांत
पेश की मानव सेवा की मिसाल
असहायों, बीमारों की सेवा करके मदर टेरेसा ने मिसाल पेश की। उनको संत का दर्जा मिलना सभी देशवासियों के लिए गर्व की बात है। उन्होंने प्रेम को धर्म का मूल माना और वह हर इंसान में प्रभु को देखती थीं। उनके दिल में सबके लिए करुणा थी। उनके सेवा कार्य को आगे बढ़ाने का कार्य सभी को मिलजुल कर करना है।
बिशप पीटर बलदेव, डायोसिस आफ लखनऊ
मदर के साथ बिताए पल अविस्मरणीय
मदर टेरेसा के सानिध्य में बिताए पल अविस्मरणीय हैं। वह महान थीं। 1982 में कोलकाता स्थित उनके निर्मल सदन में मिलने का अवसर मिला। वह प्रत्येक मरीज के पास जातीं और उसका हालचाल पूछती। उनके पास इतना काम था कि पल भर के लिए फुरसत नहीं थी। फिर भी कतार में खड़े हर एक व्यक्ति के पास जाकर मिलतीं। उनकी मौजूदगी स्फूर्ति देने वाली थी। संत की उपाधि मिलना हम सभी के लिए गौरव की बात है।
पादरी राजेश जोसेफ, पल्ली पुरोहित, होली ट्रिनटी चर्च
मानवता की मूर्ति हैं मदर टेरेसा
मानवता की मूर्ति हैं मदर टेरेसा। उन्होंने मानव सेवा करके ईश्वरीय सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया । उन्हें संत की उपाधि मिलना हमारे लिए गौरव का क्षण है। उनके सेवाकार्यों को आगे बढ़ाने के लिए हम सबको आगे आना होगा, तभी समाज में प्रेम भाईचारा बढ़ेगा।
पादरी प्रवीण मैसी, पल्ली पुरोहित सेंट पीटर्स चर्च म्योराबाद
मदर को समर्पित एंटी अल्कोहल प्रोजेक्ट
मदर टेरेसा के बताए रास्ते पर चलकर ही मानवता की सच्ची सेवा की जा सकती है। उन्हें संत का दर्जा मिलने पर सभी भारतीय को गर्व है। उनके काम को देर से लोगों ने समझा, यही कारण रहा कि 19 वर्षों तक उनके कार्यों के बारे में रिसर्च की गई। जमुना चर्च की ओर से शुरू किया गया एंटी अल्कोहल ए सोशल वेलफेयर प्रोजेक्ट मदर को समर्पित है।
पादरी आशीष खंडेलवाल, पल्ली पुरोहित जमुना चर्च