पुराने शहर के कई मोहल्लों में चिह्नित किए गए संदिग्ध कोरोना संक्रमित जांच से कतरा रहे हैं। इससे इलाके में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। संदिग्ध लोगों को आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सर्वे कर चिन्हित किया है। आंकड़ों के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या पांच हजार से अधिक है इलाके में शनिवार को जांच कराने के लिए पुलिस का भी सहारा लेना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ताओं के मुताबिक अभी बहुत से ऐसे संदिग्ध हैं जिन्होंने अपनी जांच नहीं कराई है। ऐसे लोग जुकाम, बुखार, खांसी, बीपी, शुगर सहित कई बीमारियों से ग्रसित भी हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक शहर के कीडगंज, मुट्ठीगंज, रानीमंडी, जॉनसनेगंज, कटघर, कल्याणी देवी, नखास कोहना, बेनीगंज, करेली, मीरापुर, सुल्तानपुरभावा, कटघर, बाई का बाग, रामबाग, साउथ मलाका, चंद्रलोक के आसपास, लोकनाथ, भारती भवन और उसके आसपास के मोहल्लों में बड़ी संख्या में लोगों में बुखार, जुखाम, खांसी, सर्दी, बीपी, शुगर आदि बीमारियां हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का एक संयुक्त सर्वे अभियान चलाया था। अभियान के जरिए ही ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया।
आंकड़ों के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या पांच हजार से अधिक है। इन इलाकों में संक्रमण के खतरे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के कीडगंज शाखा, बेनीगंज शाखा और डफरिन में तीन स्थानों पर रैपिड एंटीजन टेस्ट जांच करा रहा है। लेकिन इन स्थानों पर ज्यादा संख्या में लोग जांच कराने नहीं आ रहे हैं। जबकि इसके लिए उन्हें बाकायदा तैयार किया जा रहा है और उन्हें यह बताया जा रहा है कि जांच कराने से कोरोना नहीं हो जाता है। इसके बावजूद लोग मान नहीं रहे हैं।
स्वास्थ्य कर्मियों के पूछने पर कहते हैं कि वह ठीक है उन्हें कोई परेशानी नहीं है। फिलहाल इन इलाकों में रोजाना दो दर्जन से अधिक नए के सामने आ रहे हैं। संक्रमित एक या दो की मौत भी हो रही है। कीडगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की डॉक्टर श्रेया पांडे कहती हैं कि मुट्ठीगंज इलाके में आधा दर्जन से अधिक मौत हो चुकी है। वह खुद आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ लोगों के घरों पर जाकर रहीं हैं और जांच कराने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके बावजूद लोग दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उच्चाधिकारियों को भी जानकारी दी गई। शनिवार को कुछ लोगों की जांच कराने के लिए पुलिस का सहारा लेना पड़ा तब लोग घरों से बाहर आए और कीडगंज सेंटर पर जांच कराया गया।
डॉक्टर श्रेया पांडे ने कहा कि लोग नजरअंदाज कर रहे हैं इसकी वजह से उन्हें दिक्कत भी हो रही है और संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है। फील्ड में काम कर रहे मेडिकल ऑफिसर डॉ मिशम जैदी कहते हैं कि लोगों को जांच कराने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। बावजूद इसके लोग जांच से कतरा रहे हैं। जबकि लोगों को खुद ही जांच सेंटरों पर पहुंचकर जांच करानी चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा टलेगा और बीमारी को भी हराने में मदद मिलेगी।