नर और किन्नर दोनों का संगम की इस भूमि पर एक साथ स्नान करने का तुलसी दास जी ने उल्लेख किया है। तीर्थराज सबको मिलाता है। उन्होंने तीर्थ के लक्षण भी बताए। कहा कि किसी भी तीर्थ के कुछ लक्षण होते हैं। वैसे तो संपूर्ण भारत ही तीर्थ है। लेकिन, जहां जल हो,अक्षयता हो, वहीं तीर्थ है। चाहे सरिता के रूप में हो या सरोवर के रूप में। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में ज्ञानरूपी अनादि काल से अक्षयवट की जड़ें साक्षात तीर्थ के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि कभी तेजाब जैसा ज्वलनशील पदार्थ इसकी जड़ों में डाल दिया गया था कि यह नष्ट हो जाए, लेकिन अक्षयवट हरा भरा ही रहा। अक्षयवट अनादि काल से तीर्थ के रूप में विराजमान हैं। प्रलयकाल में भी इसका क्षरण नहीं हुआ था। हमारी सनातन परंपरा में जिसके प्रति अटल विश्वास है,वही अक्षयवट है। कोई माई का लाल इसे मिटा नहीं सकता।
मोरारी बापू ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सेफोन पर बातकर कुंभ के दिव्य आयोजनके लिए बधाई दी। व्यास पीठ से इसकी जानकारी उन्होंने दी। बापू ने बताया कि मैंने सीएम योगी को साधुवाद दिया है। ऐसा दिव्य कुंभ पहले नहीं हुआ था। पहली बार संगम तट पर गंगा-यमुना में श्रद्धालुओं-संतों को अविरल-निर्मल प्रवाह मिल रहा है।