स्थानीय पुलिस चौकी अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन गांव में इन दिनों बंदरों के आतंक से ग्रामीणों में खौफ का माहौल है। पिछले दिनों में बंदरों के हमले से दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। इस डर से ग्रामीण बाहर निकलने से बच रहे हैं। लोगों ने वन विभाग की उदासीनता पर असंतोष जताया है।
क्षेत्र के पियरी, पटना उपरहार, मिर्जहांपुर, गढ़वा, सोमवर्षा व पाठक का पूरा गांव में विगत कई महीनों से बंदरों का आतंक चरम पर है। बंदरों के आतंक से महिलाएं, युवतियां और बच्चे घर से बाहर निकलने में भी डरने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बंदर इतना आक्रामक हो गए हैं कि सीधे लोगों पर हमला कर रहे हैं।
किसानों के खेत में जाने के दौरान भी बंदरों का झुंड उन पर हमला कर देता है। इस डर से महिलाएं घरेलू कामकाज के लिए भी छतों पर जाने से बच रही हैं। आलम यह है कि शाम होते ही लोग अपने घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हैं।
जिम्मेदार बने उदासीन, विधायक से शिकायत
समाजसेवी राजन मिश्र, शिव विशाल तिवारी, दारा यादव व शिव कैलाश यादव ने बताया कि समस्या को लेकर वन विभाग के अधिकारियों को लगातार सूचित किया जा रहा है, लेकिन उनके द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय लापरवाही से निराश होकर समाजसेवी नीरज पांडेय ने मंगलवार को फाफामऊ विधायक गुरुप्रसाद मौर्य से समस्या की शिकायत की गई। इस पर विधायक ने जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घायलों की लग रही भीड़
बंदरों के आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बंदरों के हमलों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घायलों की कतार लग रही है। विगत दिनों में नन्हेलाल यादव, रोहित यादव, मांगू पाल, दछदू श्रीवास्तव, सुमिता सरोज, विजय सरोज, संजय यादव, विनोद गौतम, प्रदीप गौतम, रामनरेश, शिवकांत तिवारी, रामनिहोर, बचईलाल, उमेश कुमार, गुड्डू, कैमहिन व शिवकैलाश यादव समेत दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं।
बोले अफसर
केवल मंगलवार के दिन ही बंदर काटने के नौ मरीज एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंचे हैं। इन दिनों अस्पताल में बंदरों से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है।
- डाॅ. अमरेश वर्मा, सीएचसी प्रभारी, कौड़िहार