पुलिस ने रिश्तेदारों की भी सौंपी सूची
आशंका है कि पांच ड्रमों में लाई गई नकदी में से दो की रकम खर्च कर दी गई है। अब इस रकम का पता लगाने के लिए राकेश और राजेश के रिश्तेदारों की संपत्तियों की पड़ताल की जा रही है। आयकर विभाग जमीन, मकान समेत दूसरी परिसंपत्तियों का ब्योरा जुटा रहा है। जांच में छह साल में खरीदी गई संपत्तियों के स्रोत का पता लगाया जा रहा है।
कारोबार के लिए जुटाई थी रकम या कोई और था मकसद?
पुलिस और आयकर विभाग पता लगा रहा है कि राकेश, राजेश ने कारोबार का विस्तार करने और कंपनी खोलने के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाई थी या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य था। पुणे से सात बैगों में 15 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी लाने की जानकारी भी जांच के दायरे में है। आशंका है कि रकम लाने के लिए ट्रेन के जनरल कोच और निजी वाहनों का इस्तेमाल किया गया है।
रिश्तेदारों की संपत्तियों से खुलेगा खर्च का राज
आयकर विभाग की टीम राकेश और राजेश के करीबियों के बैंक खातों और संपत्तियों का मिलान कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं नकदी को अलग-अलग लोगों के खातों और संपत्तियों के माध्यम से तो नहीं खपाया गया। डीसीपी गंगापार सोनम कुमार ने बताया कि आयकर विभाग की ओर से लगातार जांच की जा रही है।