मनोविज्ञानशाला उत्तर प्रदेश की ओर से अभिभावकों एवं बच्चों पूरे दो महीने तक दी जाएगी सलाह
प्रयागराज। बच्चों की इन समस्याओं का निवारण करने के लिए एससीईआरटी संजय सिन्हा के निर्देश पर मनोविज्ञानशाला उत्तर प्रदेश की निदेशक उषा चंद्रा के निर्देशन में तीन सितंबर से 10 से दो बजे के बीच दो महीने तक कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला में अभिभावकों एवं बच्चों को डॉ. कमलेश तिवारी प्रधानाध्यापक (मनोविज्ञान) एवं अन्य शिक्षक परामर्श देने के साथ उनकी समस्याओं का निराकरण करेंगे। कार्यशाला के दौरान अभिभावकों एवं बच्चों के मोबाइल, ब्यवहार संबंधी, बोलन संबंधी, पढ़ने संबंधी, बच्चों में नाखून चबाना, पढ़ाई में मन न लगना जैसी समस्याओं के निदान के बारे में परामर्श दिया जाएगा।
बच्चों को मोबाइल देना खतरे की घंटी
बच्चों में मोबाइल के लगातार उपयोग के चलते बढ़ रही समस्या के बारे में आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली के फेलो रहे और जाने माने मनोवैज्ञानिक डॉ. आलोक मिश्र का भी इस बारे में कहना है कि अगर आप अपने बच्चों को मोबाइल, टैबलेट दे रहे हैं, उनके सामने लगातार मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं तो यह आपके बच्चे केलिए खतरे की घंटी है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कार्यक्रम में गत दिनों भाग लेने आए डॉ. आलोक मिश्र ने अमर उजाला को बताया कि आपको मोबाइल के चलते बच्चों में होने जुड़े खतरे के बारे में पता होना चाहिए। लगातार मोबाइल के उपयोग से आपके बच्चेव्यवहार संबंधी समस्या के शिकार होने लगते हैं, वह परिवार में माता-पिता एवं अन्य लोगों से दूर भागने की कोशिश करते हैं। उन्हें बोलने और पढ़ने संबंधी समस्या आती है। देखने में आ रहा है कि बच्चे टेक्नालॉजी एक्सपर्ट हो गए हैं, बच्चे माता-पिता को ही मोबाइल और कंप्यूटर का ज्ञान देते दिखाई पड़ रहे हैं। बच्चों की इस प्रकार की गतिविधि से उनका मानसिक विकास रुक जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों को स्मार्ट फोन देना उन्हें एक कोकेन देने के बराबर है।