नैनी सेंट्रल जेल से पैरोल पर रिहा 39 सजायाफ्ता बंदियों में 20 ने तो जेल में आमद करा ली है, लेकिन अभी भी 19 बंदी वापस नहीं लौटे हैं। उनको जेल में वापस लाने के लिए जेल प्रशासन की ओर से संबंधित जिलों के पुलिस कप्तान को पत्र भेजा गया है। इस बीच सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से एक दर्जन से ज्यादा बंदियों के मोबाइल नंबर ही गलत पाए गए। जिससे पुलिस और जेल प्रशासन दोनों परेशान हैं। अब इन बंदियों के वारंट पर दर्ज पते के आधार पर इन्हें खोजा जा रहा है। हालांकि जेल प्रशासन यह मानने को तैयार नहीं है।
बताते चलें कि कोरोना संक्रमण के दौरान संभावित सात साल तक की सजा पाने वाले 39 सजायाफ्ता बंदियों को मार्च- अप्रैल में आठ हफ्ते की पैरोल पर रिहा किया गया था। इन बंदियों की दो बार आठ-आठ हफ्ते की पैरोल बढ़ी। 20 नवंबर को शासन से आदेश आया कि पैरोल पर रिहा बंदियों को तीन दिन के अंदर वापस जेल लाया जाए।
इसके बाद जेल प्रशासन की ओर से सभी 37 कैदियों को टेलीफोन व अन्य संशाधनों के जरिए सूचित करके 21 से 23 नवंबर के बीच जेल से सरेंडर करने का आदेश पहुंचने लगा। जेल प्रशासन के मुताबिक अब तक कुल 39 बंदियों में से 20 वापस आ चुके हैं। 19 बंदी नहीं आए हैं। उनको वापस लाने की प्रक्रिया चल रही है।
सूत्रों की मानें तो इस दौरान पता चला कि एक दर्जन से ज्यादा बंदियों ने जो मोबाइल नंबर जेल रिकार्ड में दर्ज कराया था, वो या तो बंद हैं, या फिर स्थाई रूप से सेवा में नहीं हैं। जिससे जेल प्रशासन को उनसे संपर्क करने में दिक्कत आ रही थी। इसके लिए जेल प्रशासन ने इन कैदियों के जिलों की पुलिस कप्तान को पत्र भेजकर इनके वारंट पर दर्ज पते पर पुलिस भेजकर उन्हें जेल में हाजिर कराने को कहा है। इनमें चित्रकूट, कौशांबी, बांदा और प्रयागराज के सजायाफ्ता बंदी हैं।
पैरोल पर रिहा बंदियों की वापसी कराई जा रही है। अब तक 20 बंदी वापस आ चुके हैं। बाकी बचे बंदी भी जल्द जेल में वापस आ जाएंगे। मोबाइल नंबर बंद होना कोई अपराध नहीं है। कई बार जो नंबर यहां लिखा होता है, वह रिचार्ज न होने की वजह से बंद हो गया होता है। हम मोबाइल नंबर के जरिए नहीं वारंट पर दर्ज पते के जरिए इन कैदियों की वापसी कराना सुनिश्चित कर रहे हैं। पीएन पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, नैनी सेंट्रल जेल, प्रयागराज।