मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बीच करीब 60 वर्षों से चला आ रहा जमीन का विवाद खत्म हो गया है। इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना के लिए ली गई जमीन के बदले में संस्थान विश्वविद्यालय को 17 एकड़ जमीन देगा। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव तथा एमएनएनआईटी के निदेशक प्रोफेसर आरएस वर्मा ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
एमएनएनआईटी की स्थापना 1961 में क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। इसके लिए विश्वविद्यालय से जमीन ली गई थी। समझौता हुआ था कि एमएनएनआईटी प्रशासन दूसरी जगह उतनी ही जमीन विश्वविद्यालय को देगा। इसे लेकर जनवरी में दोनों संस्थानों की कमेटी बनाई गई थी। विश्वविद्यालय की चार सदस्यीय तथा एमएनएनआईटी की नौ सदस्यीय समिति ने समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके तहत एमएनएनएनआई को विश्वविद्यालय को 17 एकड़ जमीन देनी होगी।