फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एमएनएनआईटी प्रयागराज की मेस में पच्चीस लाख रुपये का गबन

Tue, 02 Apr 2019 02:05 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
2000 rupees
विज्ञापन
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के स्वामी विवेकानंद छात्रावास का मेस एकाउंटेंट लाखों रुपये का गबन करके फरार हो गया। मामला खुलने के बाद जब पड़ताल कराई गई तब करीब पौने 25 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया। आगे जांच में इस रकम के बढ़ने की भी आशंका है। खुलासा होने के बाद छात्रावास वार्डेन ने शिवकुटी थाने में एकाउंटेंट के खिलाफ अमानत में खयानत के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
विज्ञापन


वार्डेन प्रो.शिवदत्त कुमार ने पुलिस को बताया कि छात्रावास की मेस के पैसों का हिसाब-किताब रखने को नवाबगंज, पंडित का पूरा निवासी मनीष मिश्रा को रखा गया था। कुछ समय तक मनीष ने एकाउंट को अपडेट रखा। उसके कामकाज को देखकर चेकबुक समेत अन्य सारे कागजात भी उसके ही हवाले कर दिए गए लेकिन, मनीष ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया। कूटरचना करके छोटी-छोटी रकम खाते से निकालनी शुरू कर दी। तीन साल में करीब पौने पच्चीस लाख रुपये उसने निकाल लिए लेकिन, कुछ समय पहले एक भुगतान को दो बार कराने की कोशिश में उसका फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया।

वार्डेन के मुताबिक फरवरी माह में मनीष ने एक ऐसा बिल पेश किया, जिसका भुगतान पहले ही हो चुका था। इस बिल को देखकर मेस संचालित करने वाली कमेटी में शामिल छात्रों को शक हो गया। उन लोगों ने पुराने चेक और वाउचर निकलवाए तब फर्जी तरीके से कई बार खाते से पैसा निकालने की बात पकड़ में आई। छात्रों ने इसकी सूचना वार्डेन एवं संस्थान प्रशासन को दी। इसके बाद जांच में मनीष के फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई। जांच में करीब 24,82,620 रुपये फर्जी तरीके से निकालने की बात मालूम चली हालांकि अभी इस रकम में और इजाफा होने की आशंका है। मामला खुलते ही एकाउंटेंट फरार हो गया। इंस्पेक्टर शिवकुटी का कहना है कि वार्डेन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना शुरू करा दी गई है।
विज्ञापन


विवेकानंद छात्रावास के एकाउंटेंट मनीष ने मेस में आने के कुछ समय बाद से ही खेल शुरू कर दिया। छात्रों की कमेटी ने जिन बिल बाउचरों को खंगाला, उससे मालूम चला कि वर्ष 2016 से ही फर्जी हस्ताक्षर बनाकर मनीष खाते से रुपये निकाल रहा था लेकिन, हैरत की बात यह कि इतने वर्षों बाद भी न वार्डेन को कुछ पता चला और न कॉलेज प्रशासन को कोई भनक लगी। यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि एमएनएनआईटी के सिर्फ इसी छात्रावास में बाहरी एकाउंटेंट को रखा गया, जबकि दूसरे छात्रावासों में संस्थान से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ही रखा गया है। पुलिस का कहना है विवेचना के बाद यह साफ हो सकेगा कि यह काम अकेले मनीष ही कर रहा था या उसकी कोई मदद भी कर रहा था
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें