अल्लापुर पुलिस चौकी के सामने विधायक विजय मिश्रा के पांच मंजिला व्यावसायिक कांप्लेक्स के सामने बुधवार को दिन भर तमाशबीन जुटे रहे। विजय मिश्रा इन दिनों आगरा जेल में बंद हैं। ध्वस्तीकरण के आदेश के इंतजार में पीडीए अफसर और पुलिस फोर्स भी मुस्तैद रही, लेकिन शाम को ध्वस्तीकरण मामले में रोक के आदेश के बाद सभी लौट गए।
पीडीए सूत्रों के मुताबिक विजय मिश्रा के कांप्लेक्स को ध्वस्त करने के लिए अफसरों ने पूरी तैयारी कर रखी थी। पुलिस फोर्स भी तैयार थी, इंतजार था तो बस कमिश्नर के आदेश का, जो शाम तक नहीं मिला। बाद में आए आदेश में कार्रवाई से विधायक को राहत देते हुए सुनवाई का मौका दिया गया है। इस मामले में पीडीए अफसर भी तलब किए गए हैं।
उधर पीडीए में विजय मिश्रा के कांप्लेक्स और मकान की भूमि संबंधी पत्रावलियों को खंगालने काम जारी रहा। सूत्र बताते हैं कि अभिलेखों में नक्शा स्वीकृति के संबंध में कोई पत्राचार नहीं पाया गया। वहीं जारी नोटिस और उनकी तामीला के बारे में जानकारी एकत्र की गई। पूरे मामले में पीडीए अफसरों ने सिर्फ इतना बताया कि आदेश का अनुपालन किया जाएगा।
चूंकि विजय मिश्रा की अपील कमिश्नर कोर्ट में थी, इसलिए हर अफसर इस बारे में कुछ बोलने से बचते रहे। वहीं पीडीए ने किराए पर मंगाई गई पोकलैंड मशीन देर शाम वापस ले जाने का मौखिक आदेश दिया गया। प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के लिए पीडीए और नगर निगम की जेसीबी मशीनें दिन भर खड़ी रहीं। प्रवर्तन दल के अधिकारी, कर्मचारी वरिष्ठ अफसरों के आदेश का इंतजार करते रहे। इसके कारण बुधवार को शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया जा सका।
अल्लापुर पुलिस चौकी के पास उस कांप्लेक्स के पास बुधवार को दिन भर तमाशबीन जुटे रहे। वाहनों से आने जाने वाले भी, रुककर कार्रवाई के बारे में पूछते और आगे बढ़ जाते। कांप्लेक्स के सामने भी कुछ लोग जुटे रहे। बताया गया कि वह कारोबारी हैं और विजय मिश्रा के कांप्लेक्स में किराएदार थे। देर शाम तक कार्रवाई न होने के कारण लोग तरह-तरह की चर्चा करने लगे। लोग यह भी कहते सुने गए कि अतीक समेत अन्य माफियाओं के साथ नोटिस, अपील जैसी राहत की बात सामने नहीं आई। इस मामले में ऐसा क्या हो गया कि तमाम प्रशासनिक तैयारियों के बीच धवस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।