हत्या और जानलेवा हमले के मुकदमे में स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने विधायक मुख्तार अंसारी की तीसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। मुख्तार की अर्जी पर यह आदेश स्पेशल कोर्ट जज पवन कुमार तिवारी ने जेष्ठ अभियोजन अधिकारी हरिओंकार सिंह, राधाकृष्ण मिश्र, लाल चंदन और एडीजीसी राजेश गुप्ता और वादी के अधिवक्ता प्रमोद सिंह नीरज को सुनकर दिया है।
मुख्तार पर 19 मार्च 2010 की मऊ के दक्षिण टोला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वादी का कहना है कि वह मोहम्मदाबाद की तरफ से मऊ आ रहा था। वहां उसके भाई की सफारी गाड़ी पर चार लोग अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे। गाड़ी पर बैठे राम सिंह मौर्य और सिपाही सतीश कुमार को गोली लगी थी। अस्पताल ले जाते समय राम सिंह मौर्य की मौत हो गई थी। थाने में मुख्तार अंसारी सहित पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
सोमवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि अभियुक्त की जमानत अर्जी जिला जज मऊ द्वारा गुण दोष के आधार पर 19 जुलाई 2012 को निरस्त की जा चुकी है और हाईकोर्ट ने छह अगस्त 2018 को जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। मुकदमा गवाही में लंबित है। अपराध की गंभीरता को देखते जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं है।