कोरांव निवासी 29 वर्षीय महिला का चार साल तक मधुमेह का गलत इलाज होता रहा। इस कारण महिला के हाथ-पैर की नसें खराब हो गईं। इससे उसका चलना-फिरना मुश्किल हो गया। महिला को करीब चार साल पहले डायबिटीज की शिकायत हुई थी। उसने गांव से लेकर शहर तक कई डॉक्टरों से उपचार कराया। डॉक्टरों ने दवा से महिला का डायबिटीज नियंत्रित करना चाहा, मगर शुगर नियंत्रित होने की बजाए बढ़ता गया।
टाइप-वन और टाइप-टू डायबिटीज में अंतर
टाइप-वन में शरीर बिल्कुल इंसुलिन नहीं बनाता है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है। जबकि टाइप-टू में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इसका सही उपयोग नहीं कर पाता है। इसे इंसुलिन प्रतिरोध कहते हैं।