याची के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने तर्क दिया कि याची को मंडी समिति मिर्जापुर में अनुकंपा नियुक्ति के तहत निरीक्षक के पद पर नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया, जबकि उनकी नियुक्ति पर्यवेक्षक के पद पर प्रस्तावित थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याची को मिर्जापुर मंडी परिषद में पर्यवेक्षक की जगह निरीक्षक के पद पर तैनात किए जाने के मंडी परिषद के निदेशक के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मंडी परिषद के निदेशक मामले में नए सिरे से विचार कर दो महीने में उचित निर्णय लें। यह आदेश अजीत कुमार ने धीरेंद्र कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने तर्क दिया कि याची को मंडी समिति मिर्जापुर में अनुकंपा नियुक्ति के तहत निरीक्षक के पद पर नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया, जबकि उनकी नियुक्ति पर्यवेक्षक के पद पर प्रस्तावित थी। उन्हें प्रस्तावित पद के मुकाबले नीचे के पद पर नियुक्ति का आदेश जारी किया गया है।
पर्यवेक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए मंडी समिति के उपनिदेशक की ओर से भी कोई आपत्ति नहीं की गई थी। निदेशक के निर्देश पर ही मंडी समिति के उप निदेशक ने पर्यवेक्षक के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव भी भेजा था। इसके बावजूद उन्हें निरीक्षक के पद पर तैनात करने का आदेश जारी कर दिया गया।
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कोर्ट ने कहा कि मंडी परिषद के निदेशक ने निरीक्षक के पद पर तैनाती के लिए आदेश पारित करते समय कोई वजह नहीं बताई है। कोर्ट ने इस वजह से निदेशक के आदेश को रद्द कर दिया और मामले में फिर से विचार कर उचित निर्णय लिए जाने का आदेश दिया।