इलाहाबाद हाईकोर्ट ने युवक पर दर्ज नाबालिग के अपहरण का मुकदमा रद्द कर दिया। कहा, रूठकर घर छोड़ने वाले नाबालिग को अपहृत नहीं कहा जा सकता। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की अदालत ने देवरिया निवासी हिमांशु दुबे की याचिका स्वीकार करते हुए की। कहा, अभियोजन ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने (अपहरण) का आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया पर उसे साबित करने में विफल रहा।
विज्ञापन
मामला देवरिया के थाना गौरी बाजार का है। आरोप है कि याची नाबालिग को भगा ले गया लेकिन पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि परिजनों ने उसे पीटा और बिजली का झटका दिया। इससे आहत होकर वह खुद घर से निकल गई और दो दिन तक बिहार के सीवान में रही। मेडिकल जांच में भी यह सामने आया कि उसके साथ कोई यौन संबंध नहीं बने।