कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं होने का भी आरोप
इसके अलावा त्रिवेणी, काली, महावीर, अक्षयवट, मोरी, ओल्ड जीटी, नागवासुकि, हरिश्चंद्र, भरद्वाज, अनंत माधव, बजरंग दास, कैलाशपुरी और संकटमोचन मार्गों पर काम भी या तो धीमा है या जहां हुआ भी है तो गुणवत्तापूर्ण नहीं है। इन मार्गों पर बिना क्लैंपिंग के चकर्ड प्लेट फेंक देना भी आम बात है। यह स्थिति कतई स्वीकार्य नहीं है।
महाकुंभ-2025 में बनाए जाने वाले 30 पांटून पुलों में से अब तक सिर्फ पांच पुल ही बन पाए हैं, जो लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैये को परिलक्षित करता है। कई बार बैठकों में उल्लेख करने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है। मेलाधिकारी ने पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को चेताया है कि 20 दिसंबर तक प्रमुख मार्गों और पांटून पुलों का निर्माण पूरा करें, अन्यथा मेले की बसावट पर प्रतिकूल प्रभाव डालने जैसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार मानते हुए कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति की जाएगी।