बसपा प्रत्याशी ने की वोटों की सेंधमारी
तीसरे नंबर पर रहे बसपा से ब्राह्मण प्रत्याशी सर्वेश चंद्र तिवारी ने भी भाजपा के वोटों में सेंधमारी की। सर्वेश को कैडर वोट तो मिले ही, स्थानीय ब्राह्मणों का भी समर्थन मिला और इसका फायदा भी सपा को मिला। नतीजे सामने आने के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि नीलम करवरिया की क्षेत्र के पुराने ब्राह्मणों से संवाद की कमी भी उन्हें भारी पड़ी है। पुराने एवं प्रभावी ब्राह्मण परिवारों ने खुद को उनके चुनाव प्रचार से दूर रखा। जानकारों का मानना है कि अगर उदयभान करवरिया जेल में न होते तो समीकरण कुछ और होता।
जीत-हार का अंतर
3295
किसे कितने वोट मिले
संदीप सिंह (सपा) - 78164
नीलम करवरिया (भाजपा) - 74869
सर्वेश चंद्र तिवारी (बसपा) - 22839
शालिनी द्विवेदी (कांग्रेस) - 1547
अन्य प्रत्याशियों को मिले वोट- अवधेश कुमार को 734, दयाशंकर को 1059, धीरेंद्र प्रताप को 199, प्रवीन कुमार को 358, बबलू कुमार को 872, रामकुमार मिश्र को 342, रामपाल को 757, विवेकानंद को 824, श्रीकांत को 883, हैदर अब्बास को 539 वोट
विजयी प्रत्याशी का प्रोफाइल
छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय संदीप सिंह पटेल वर्ष 1990 में इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में बारा से अपना दल के टिकट पर तीसरे नंबर रहे। इस चुनाव में भाजपा से उदयभान करवरिया जीते थे। संदीप के बाबा के भाई सर्वसुख सिंह हेमवती नंदन बहुगुणा की नेतृत्व वाली यूपी सरकार में शिक्षा मंत्री थे।
प्राथमिकता
‘क्षेत्र के विकास में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। किसानों और गरीबों की समस्याओं का निराकरण भी मेरी प्राथमिकता में शामिल है। मेजा में बंद पड़ी कताई मिल का संचालन दोबारा शुरू कराया जा सके, इसके लिए पूरा प्रयास किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सके।’ संदीप सिंह