फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेजा विधानसभा : ब्राह्मणों और ओबीसी वोटरों ने पलटा समीकरण, नीलम की हार ने सभी को चौंकाया

Thu, 10 Mar 2022 10:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

चुनाव से पहले अचानक चर्चाओं ने जोर पकड़ा कि नीलम करवरिया को रेवती रमण सिंह का मौन समर्थन मिल गया है और भूमिहारों एवं ठाकुरों के वोटों का उन्हें फायदा मिल सकता है। यह खबर सामने आते ही भाजपा और सपा के बीच बंटे ओबीसी वोटर एकजुट होने लगे। ओबीसी वोटरों की एकजुटता भाजपा पर भारी पड़ गई और फायदा सपा को मिला।
विज्ञापन
Prayagraj News : जीत के बाद प्रमाण पत्र प्राप्त करते मेजा के नवनिर्वाचित विधायक संदीप सिंह पटेल। - फोटो : प्रयागराज
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ब्राह्मणों और ओबीसी वोटरों ने मेजा विधानसभा क्षेत्र का समीकरण ही पलट दिया। मेजा से भाजपा प्रत्याशी नीलम कवरिया की अप्रत्याशित हार और सपा प्रत्याशी संदीप सिंह पटेल की जीत के पीछे यही वजह मानी जारी है, वरना चुनाव से पहले जानकार तो यही अनुमान लगा रहे थे कि लगातार दूसरी बार यह सीट करवरिया परिवार के पास ही रहेगी। 

विज्ञापन

चुनावी जोड़तोड़ में माहिर उदयभान करवरिया जेल में हैं।




ऐसे में चुनाव के दौरान उनकी पत्नी नीलम करवरिया को अकेले मोर्चा संभालना पड़ा। चुनाव से पहले अचानक चर्चाओं ने जोर पकड़ा कि नीलम करवरिया को रेवती रमण सिंह का मौन समर्थन मिल गया है और भूमिहारों एवं ठाकुरों के वोटों का उन्हें फायदा मिल सकता है। यह खबर सामने आते ही भाजपा और सपा के बीच बंटे ओबीसी वोटर एकजुट होने लगे। ओबीसी वोटरों की एकजुटता भाजपा पर भारी पड़ गई और फायदा सपा को मिला।

बसपा प्रत्याशी ने की वोटों की सेंधमारी

तीसरे नंबर पर रहे बसपा से ब्राह्मण प्रत्याशी सर्वेश चंद्र तिवारी ने भी भाजपा के वोटों में सेंधमारी की। सर्वेश को कैडर वोट तो मिले ही, स्थानीय ब्राह्मणों का भी समर्थन मिला और इसका फायदा भी सपा को मिला। नतीजे सामने आने के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि नीलम करवरिया की क्षेत्र के पुराने ब्राह्मणों से संवाद की कमी भी उन्हें भारी पड़ी है। पुराने एवं प्रभावी ब्राह्मण परिवारों ने खुद को उनके चुनाव प्रचार से दूर रखा। जानकारों का मानना है कि अगर उदयभान करवरिया जेल में न होते तो समीकरण कुछ और होता।
विज्ञापन

जीत-हार का अंतर
3295

किसे कितने वोट मिले

संदीप सिंह (सपा) - 78164
नीलम करवरिया (भाजपा) - 74869
सर्वेश चंद्र तिवारी (बसपा) - 22839
शालिनी द्विवेदी (कांग्रेस) - 1547
अन्य प्रत्याशियों को मिले वोट- अवधेश कुमार को 734, दयाशंकर को 1059, धीरेंद्र प्रताप को 199, प्रवीन कुमार को 358, बबलू कुमार को 872, रामकुमार मिश्र को 342, रामपाल को 757, विवेकानंद को 824, श्रीकांत को 883, हैदर अब्बास को 539 वोट




विजयी प्रत्याशी का प्रोफाइल
छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय संदीप सिंह पटेल वर्ष 1990 में इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में बारा से अपना दल के टिकट पर तीसरे नंबर रहे। इस चुनाव में भाजपा से उदयभान करवरिया जीते थे। संदीप के बाबा के भाई सर्वसुख सिंह हेमवती नंदन बहुगुणा की नेतृत्व वाली यूपी सरकार में शिक्षा मंत्री थे।



प्राथमिकता
‘क्षेत्र के विकास में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। किसानों और गरीबों की समस्याओं का निराकरण भी मेरी प्राथमिकता में शामिल है। मेजा में बंद पड़ी कताई मिल का संचालन दोबारा शुरू कराया जा सके, इसके लिए पूरा प्रयास किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सके।’ संदीप सिंह
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें