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कचहरी में लगा वादकारियों का मेला

Sun, 07 Dec 2014 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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इलाहाबाद। जिला अदालत में शनिवार को आयोजित मेगा लोक अदालत में वादकारियों का रेला उमड़ पड़ा। लोक अदालत के जरिए वर्षों से लंबित मुकदमों का निस्तारण कराने के  लिए वादकारियों में होड़ लगी थी। भीड़ का आलम यह था कि नौबत धक्कामुक्की की आ गई। इस सब के बीच शाम तक लगभग 55 हजार वादों का निस्तारण कर दिया गया जबकि हजारों अभी भी बचे रह गए जिनका निस्तारण अगली लोक अदालत में होगा। लोक अदालत में करीब 12 करोड़ रुपये के वादों का निस्तारण किया गया जिससे बड़ी रकम वादकारियों को प्रतिकर के रूप में दिलाई गई। आधार कार्ड, बीपीएल कार्ड, पीएमआरवाई, मनरेगा आदि के हजारों मामले का भी निस्तारण किया गया।

लोक अदालत का उद्घाटन जिला न्यायालय के प्रशासनिक जज न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता ने किया। जिला जज दयाशंकर त्रिपाठी के मुताबिक लोक अदालत में मोटर वाहन दुघर्टना के 131 मामलों का निस्तारण किया गया जिसमें दो करोड़, 39 लाख, 90,176 हजार रुपये प्रतिकर के तौर पर दिलाए गए। इसी प्रकार से उत्तराधिकार वाद के 121 मामलों का निस्तारण करते हुए चार करोड़, 50 लाख, 24,290 रुपये की संपत्तियों के विवाद का निस्तारण कराया गया। राजस्व के 8995 हजार वाद और वैवाहिक वाद के 85 मामलों का निस्तारण किया गया। इन 85 जोड़ों को सुलह समझौता कराकर अदालत से विदा कराया गया। 22160 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण करके 22 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया। बैंकों के प्री लिटिगेशन वाद में 906 मामलों का निस्तारण कराते हुए चार करोड़ 19 लाख 32,200 रुपये के विवाद का निस्तारण किया गया। 1104 चकबंदी सहित लगभग 55 हजार मुकदमों का निस्तारण हुआ।
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लोक अदालत का आयोजन मजिस्ट्रेट अदालतों से लेकर जिला जज और अपर जिला जज की अदालतों तक में किया गया था। तमाम मामलों में प्रयास किया गया कि समाधान एक ही समय में हो जाए। इसके लिए पहले से तैयारियां की गई थी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एससी द्विवेदी और सीजेएम रिजवान अहमद का सहयोग रहा।


लोक अदालत मेें वादकारियों को भेजी गई नोटिस को तामील कराने पर पुलिस का खासा जोर रहा। प्रयास किया गया कि सबको नोटिस का तामील हो जाए मगर वादकारियों को नोटिस नंबर और तारीख नोट कराई गई जिसे लेकर लोग भटकते रहे कि उनका मामला किस अदालत में लगा है। हालांकि वकीलों ने इस काम में वादकारियों की सहायता की और संबंधित अदालत तक उनको पहुंचाया।
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ऋण वसूली अधिकरण में 25.41 करोड़ रुपये के ऋण वसूली विवाद का निस्तारण किया गया। अधिकरण के निबंधक चमनलाल अग्रवाल के मुताबिक करीब 80 वादों का निस्तारण लोक अदालत के जरिए कराया गया। बैंकों के वर्षों से फंसे ऋण की वसूली सुनिश्चित कराई गई। इसमें सबसे अधिक योगदान बैंक ऑफ बड़ौदा का था। लोक अदालत में पीठासीन अधिकारी विनय गोयल और सदस्य प्रभू जी, पूर्व जिला की पीठ बनाई गई थी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व अध्यक्ष डीआरटी न्यायमूर्ति आरएस त्रिपाठी, हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राकेश पांडेय थे। अधिवक्ता कुशलकांत, रंजन श्रीवास्तव, पवन मिश्रा आदि का इसमें सहयोग रहा।
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