अंतत: थक हार कर वह कोलकाता चले गए। इधर, 24 नवंबर को गीता निकेतन के पास घायल अवस्था में अचेत पड़ीं वृद्धा पर सेवानिवृत्त डीएफओ ललित गिरि की नजर पड़ी। ललित ने न सिर्फ उन्हें उठाकर दारागंज के धनराज ओल्ड एज होम में पहुंचाया, बल्कि वहां उन्हें अपने आधार कार्ड पर जगह दिलाई। आश्रम की संचालिका डॉ. सुजाता पांडेय बताती हैं कि घायल अवस्था में आईं वृद्धा बंग्ला में बोल रही थीं। इस वजह से उनके नाम, पते की जानकारी जुटाना मुश्किल हो गया। इस बीच सुजाता ने उनका एक वीडियो बनाकर फेसबुक के अलावा अलग-अलग व्हाट्सएप समूहों में डाल दिया।
सोशल मीडिया पर जब उनका वीडियो वायरल हुआ, तब इसकी जानकारी कोलकाता में अवक को मिली। अवक को जब पता चला कि उनकी मां प्रयागराज के वृद्धाश्रम में सुरक्षित हैं, तब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रविवार को वह आश्रम पहुंचे। अपनी मां आशा लता को देखते ही उनसे लिपट गए। मां-बेटे की खुशियों के आंसुओं ने मिलन के उन क्षणों में हर किसी को भावुक बना दिया। अवक कागज की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अपनी मां को लेकर देर शाम कोलकाता के लिए रवाना हो गए।