थोक दवा विक्रेताओं के लिए भ्रम की स्थिति
मेडिकल स्टोरों पर नहीं हैं मास्क, सैनिटाइजर
प्रयागराज। रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान स्वरूपरानी, काल्विन, डफरिन, बेली, कमला नेहरू अस्पतालों के सामने और आसपास दवा की दुकानें खुली रहीं। इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक शासन, प्रशासन के अगले निर्देश तक यही व्यवस्था लागू रहेगी। वहीं थोक दवा की दुकानें खुलेंगी या नहीं, इस पर भ्रम की स्थिति बनी है। थोक दुकानों के न खुलने से मेडिकल स्टोरों पर जरूरी दवाओं की अनुपलब्धता हो सकती है।
जनता कर्फ्यू के दौरान रविवार को दवा की दुकानों पर ग्राहक नाममात्र के रहे। उन्हीं लोगों ने दवाएं खरीदीं, जिनके मरीज अस्पताल में भर्ती थे, या गंभीर थे। जो मेडिकल स्टोर खुले वहां मास्क और सैनिटाइजर नहीं रहा। लोगों ने इन्ही दो वस्तुओं के साथ पैरासीटामाल के बारे में पूछताछ की। अन्य लोगों ने जरूरी दवाओं की खरीद करते रहे।
इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल दुबे के मुताबिक दुकानों के खुलने के बारे में शासन के निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा। कोशिश होगी कि लोगों को दवाओं की किल्लत का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि शनिवार को लोगों ने एक या दो नहीं दस दिन के हिसाब से दवाएं खरीदी हैं। फुटकर में भी दवाओं की बिक्री तेज रही। निर्देश मिलने पर स्टाफ को बुलाना पड़ेगा। थोक दवा के व्यापार में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वहीं एसोसिएशन के महामंत्री परमजीत सिंह ने बताया कि दवा की थोक या फुटकर दुकानों के खुलने के बारे में स्थिति साफ नहीं है। प्रशासन जैसी व्यवस्था करेगा, वैसा किया जाएगा।